मुस्लिम पक्ष का दावा- भोजशाला शुरू से ही कमाल मौलाना मस्जिद, ब्रिटिश म्यूजियम में रखी मूर्ति मां सरस्वती की नहीं

30 Apr 2026 23:02:53
धार की ऐतिहासिक भोजशाला


भोपाल, 30 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश के धार जिला मुख्यालय स्थित ऐतिहासिक भोजशाला विवाद मामले में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ में चल रही नियमित सुनवाई के दौरान गुरुवार को मुस्लिम पक्ष के वकील तौसीफ वारसी ने दावा किया कि भोजशाला में मां सरस्वती की मूर्ति कभी थी ही नहीं। ब्रिटिश म्यूजियम में जिस मूर्ति को मां सरस्वती का बताया जाता है, वह वास्तव में मां अंबिका की है। उन्होंने कहा कि धार में 'भोजशाला' का अस्तित्व कभी नहीं था, बल्कि वहां शुरू से 'कमाल मौला मस्जिद' रही है।

भोजशाला मामले में मप्र उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ में जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की युगलपीठ में गुरुवार हुई अहम सुनवाई करीब ढाई घंटे तक चली। सुनवाई के दौरान कमाल मौलाना वेलफेयर सोसायटी पक्ष ने कई ऐतिहासिक और कानूनी तर्क प्रस्तुत किए। कमाल मौलाना वेलफेयर सोसायटी की ओर से वकील तौसिफ वारसी ने दलील दी कि हिंदू पक्ष द्वारा कोर्ट में ऐतिहासिक तथ्यों को लेकर भ्रामक प्रस्तुतीकरण किया गया है। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश म्यूजियम में रखी मूर्ति मां सरस्वती की नहीं, बल्कि जैन धर्म की देवी अंबिका की है।

अधिवक्ता वारसी ने अपने तर्कों के समर्थन में ब्रिटिश उच्चायोग के अधिकारी सर रॉब यंग द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को लिखे गए पत्र का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक दस्तावेजों और साहित्य में भी भोजशाला में सरस्वती प्रतिमा होने का उल्लेख नहीं मिलता। वारसी ने दावा किया कि भोजशाला शुरू से ही कमाल मौलाना मस्जिद रही है और इसे लेकर गलत धारणाएं प्रस्तुत की जा रही हैं।

एएसआई और सरकार के रुख पर सवाल

अधिवक्ता वारसी ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) और सरकार के रुख पर भी सवाल उठाए। उनका तर्क दिया कि एएसआई ने दोनों याचिकाओं में अलग-अलग जवाब प्रस्तुत किए हैं, जबकि सरकार को निष्पक्ष भूमिका निभानी चाहिए और वह समय के साथ बदलना नहीं चाहिए।

अगली सुनवाई 4 मई को

गुरुवार को बहस अधूरी रही, अब मामले की अगली सुनवाई 4 मईको होगी। इसमें वकील वारसी अपनी दलीलें जारी रखेंगे। इसके बाद अधिवक्ता सलमान खुर्शीद एएसआई द्वारा सर्वे के दौरान की गई वीडियोग्राफी पर अपना पक्ष रखेंगे। गौरतलब है कि मुस्लिम पक्ष ने सर्वे की वीडियोग्राफी मुहैया न कराए जाने पर उच्चतम न्यायालय की शरण ली थी, लेकिन न्यायालय ने हस्तक्षेप से इनकार कर दिया था। बाद में जब उच्च न्यायालय में यह मांग दोहराई गई, तो अदालत ने सभी पक्षकारों को वीडियोग्राफी मुहैया कराने के निर्देश दिए। दो दिन पहले ही सभी पक्षकारों को भोजशाला की वीडियोग्राफी के फुटेज दे दिए गए हैं।

बता दें कि इस मामले में पिछले 25 से ज्यादा दिनों से सुनवाई जारी है। भोजशाला को लेकर कुल पांच याचिकाएं दायर की गई हैं, वहीं कुछ अन्य हस्तक्षेपकर्ताओं ने भी कोर्ट से अपना पक्ष रखने का आग्रह किया है। कोर्ट बारी-बारी से सभी पक्षकारों को अपनी बात रखने का मौका दे रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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