(लीड) नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विरोध करने वालों के खिलाफ यूपी विधानसभा में निंदा प्रस्ताव पारित

30 Apr 2026 18:58:53
विधान सभा में मुख्यमंत्री योगी


लखनऊ, 30 अप्रैल (हि.स.)। उत्तर प्रदेश विधानसभा के एक दिवसीस विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विराेध करने वालाें के खिलाफनिंदा प्रस्ताव ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। पूरे दिन चली कार्यवाही के दाैरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय समेत कुल 33 सदस्यों ने इस चर्चा में भाग लिया। सत्ता पक्ष के सदस्याें ने विपक्ष पर करारे प्रहार कर जमकर निंदा की और उन्हें महिलासशक्तिकरण का विराेधी बताया।

गुरुवार को महिला सशक्तिकरण मुद्दे काे लेकर राज्य सरकार ने विधानसभा का एक दिवसीय सत्र आहूत किया। पूर्वाह्न 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होने से लेकर शाम के लगभग साढ़े पांच बजे तक सदन में इस मुद्दे पर चर्चा हुई। इस दाैरान राज्य के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने लाेकसभा में नारी वंदन अधिनियम का विरोध करने वालों के खिलाफ एक निंदा प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इस माैके पर मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि भाजपा सरकार राजनीति में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए पूर्णत: प्रतिबद्ध हैं। जब तक नारी शक्ति को नीति निर्धारण में उचित संवैधानिक अधिकार नहीं मिल जाता, तक तक हम नारी सशक्तिकरण विरोधियों की निंदा करते रहेंगे। प्रस्ताव में कहा गया कि नारी सुरक्षा, सम्मान एवं स्वालंबन की दृष्टि से भारत की संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के संशोधन में बाधा बने सपा, कांग्रेस एवं इंडी गठबंधन के सभी दलों के नारी सशक्तिकरण विरोधी आचरण का यह सदन निंदा करता है।

सदन में निंदा प्रस्ताव आने के बाद विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि मैं इस निंदा प्रस्ताव का विरोध करता हूं और इसकी अति निंदा करता हूं। पीठ से विधानसभा अध्यक्ष ने संसदीय कार्य मंत्री के प्रस्ताव को पढ़कर सदन को सुनाया और पक्ष विपक्ष के सदस्यों से ध्वनि मत के लिए अपील की। इसके साथ ही सदन में सत्ता पक्ष की संख्या अधिक होने के नाते निंदा प्रस्ताव ध्वनि मत से पारित हो गया।

इससे पहले मुख्यमंत्री याेगी ने सदन में प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि हम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का हृदय से आभार व्यक्त करते हैं कि उन्होंने 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित कर आधी आबादी को उनका हक दिलाने का ऐतिहासिक कदम उठाया। परंतु 2029 में इसे लागू करने के प्रस्ताव पर 17 अप्रैल को संसद में इंडी गठबंधन के सभी दल बाधक बन गए। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी का चरित्र 1995 के स्टेट गेस्ट हाउस कांड में सबके सामने आ गया था। प्रदेश की पहली दलित मुख्यमंत्री के साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया। उस समय भाजपा ने मायावती को समर्थन देकर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की, जबकि नैतिक दायित्व आपका (सपा) था। भाजपा नेता ब्रह्मदत्त द्विवेदी ने तब अपनी जान पर खेलकर उन्हें समाजवादी पार्टी के गुंडों से बचाया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आप किस नारी गरिमा की बात करते हैं ? बदायूं जैसी घटनाओं पर आपके नेताओं के गैर-जिम्मेदाराना बयान आज भी याद किए जाते हैं। मैं भौचक्का हूं कि आप अभी भी महिलाओं की बात करते हैं। आप सभी महिलाओं के श्राप से शापित हैं। कांग्रेस की दुर्गति आप देख ही रहे हैं। उत्तर प्रदेश में 40 वर्ष से वह लगातार बंजर होती जा रही है।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कांग्रेस के पतन का मुख्य कारण शाहबानो प्रकरण में एक मुस्लिम महिला के साथ किया गया अन्याय और मौलवियों के सामने घुटने टेकने की उसकी मानसिकता थी। तीन तलाक के मुद्दे पर भी आपका महिला-विरोधी चेहरा साफ दिखा। नेता सदन ने कहा कि समाजवादी पार्टी की विधायक पूजा पाल प्रकरण, स्टेट गेस्ट हाउस कांड, आजम खान, एसटी हसन और अबू आजमी जैसे नेताओं के महिला-विरोधी बयान स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि आप जाति के नाम पर समाज को बांटते हैं। महिलाओं, दलितों और पिछड़ों के प्रति आपकी कोई सहानुभूति नहीं है।

योगी ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में डबल इंजन सरकार के उठाए गए कदमों का परिणाम आज स्पष्ट दिख रहा है। 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में ‘देख सपाई, बिटिया घबराई’ का नारा आम था। उस समय महिला कार्यबल भागीदारी मात्र 13 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 36 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गई है। इसका सीधा प्रभाव यह हुआ कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था तीन गुना बड़ी हुई और प्रति व्यक्ति आय भी तीन गुना बढ़ी। उन्हाेंने कहा कि एनसीआरबी आंकड़ों के अनुसार पिछले वर्षाें में महिला अपराध में उल्लेखनीय कमी आई है। हत्या के मामलों में 45फीसदी, दहेज मृत्यु में 19फीसदी और बलात्कार-दुष्कर्म के मामलों में 67फीसदी की कमी दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री योगी ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि आप लोगों के आचरण को देखकर गिरगिट भी शर्म से पानी-पानी हो जाएगा। संसद में एक रंग और विधानसभा में दूसरा रंग। दिल्ली से लखनऊ पहुंचते ही आप रंग बदल लेते हैं।

मुख्यमंत्री ने विधानसभा में कहा कि जब महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा व परिश्रम से लोहा मनवा रही हैं और बेहतरीन नेतृत्व दे रही हैं, तो आप लोग क्यों बाधक बन रहे हैं? मुख्यमंत्री ने कटाक्ष किया कि जो लोग काले कर्मों से राजमहल सजाते हैं, वही इतिहास में कलंक बन जाते हैं। उन्होंने कहा कि 17 अप्रैल को लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसा महत्वपूर्ण प्रस्ताव गिराकर समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, डीएमके और टीएमसी ने अपने ऊपर कलंक लगाने का काम किया। आपके आचरण थसे पूरा सदन और पूरा देश आहत है। हम इसकी निंदा करते हैं।

योगी ने कहा कि वर्तमान में भारतीय संसद में महिलाओं की संख्या मात्र 15 प्रतिशत है, जबकि उत्तर प्रदेश विधानसभा में यह केवल 11-12 प्रतिशत तक सीमित है। यदि 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाए तो आधी आबादी को उनके अधिकारों के अनुरूप प्रतिनिधित्व मिल सकेगा। इस चर्चा के दाैरान सभी दलाें के नेताओं ने भी अपना-अपना पक्ष रखा।

सुबह सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के सदस्याें ने चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा पर सरकार के विरोध में आंशिक धरना दिया। वहीं सत्ता पक्ष की महिला सदस्यों के नेतृत्व में भाजपा के विधायक व मंत्री पैदल मार्च करते हुए सदन तक पहुंचे। उनके हाथाें में नारी शक्ति वंदन अधिनयम के पक्ष में और अधिनियम को पारित कराने में बाधा बनने वालों के खिलाफ स्लोगन लिखे हुए थे।

हिन्दुस्थान समाचार / दिलीप शुक्ला

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