'अयोध्या पर्व' समाज के जागरण का आधार है: रामबहादुर राय

05 Apr 2026 20:55:53
आईजीएनसीए में सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान लोग मौजूद।


नई दिल्ली, 05 अप्रैल (हि.स.)। इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए) के अध्यक्ष रामबहादुर राय ने रविवार को कहा कि अयोध्या पर्व केवल एक आयोजन नहीं बल्कि समाज के जागरण का आधार है।

रामबहादुर राय ने यह बात दिल्ली स्थित आईजीएनसीए और अयोध्या न्यास के सहयोग से आयोजित तीन दिवसीय (3-5 अप्रैल) ‘अयोध्या पर्व’ के समापन के दौरान कही।

उन्होंने कहा, अयोध्या पर्व में निरंतरता और नवीनता है यही निरंतरता इसे विशेष बनाती है। वर्तमान की अयोध्या से समाज में जागरण आया, जो भविष्य की अयोध्या का आधार बनेगा। चाहे अयोध्या के नगर नियोजन का पक्ष हो, या अध्यात्म का पक्ष हो, अयोध्या पर्व एक मंच है, जिस पर लोग अपनी बात कह सकें। यही अयोध्या पर्व का प्रयोजन है।

श्रीरामजन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय ने कहा कि भारत की मूल पहचान समृद्धि, संवेदनशीलता और सामाजिक आत्मीयता की रही है। पराधीनता के बावजूद समाज ने अपने स्वाभिमान को बनाए रखा और स्वतंत्रता के बाद देश को पुनः उसके स्वाभाविक स्वरूप में लाने का प्रयास निरंतर चलता रहा, जिसमें विभिन्न संतों और रामजन्मभूमि आन्दोलन की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

रामजन्मभूमि आंदोलन इस चिंता से निकला कि समाज को जगाया कैसे जाए। मंदिर निर्माण तो उस जागरण का फल है। अयोध्या के स्वरूप में समय के साथ व्यापक परिवर्तन आया है। अयोध्या पर्व के माध्यम से 84 कोसी परिक्रमा और इसकी सांस्कृतिक व्यापकता को समाज के सामने लाने का सार्थक प्रयास किया गया है। आज आवश्यकता केवल मंदिर निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि राम के आदर्शों और जीवन मूल्यों को अपने आचरण में उतारने की है। उन्होंने अयोध्या में व्यवस्थाओं के बारे में बात करते हुए कहा कि धीरे-धीरे और भी बदलाव आएंगे।

उन्होंने कहा कि लल्लू सिंह के प्रयासों से 84 कोसी परिक्रमा मार्ग जैसे कार्य आगे बढ़े हैं। अयोध्या का यह परिवर्तन केवल भौतिक विकास नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जागरण की एक सतत प्रक्रिया है, जो आगे भी निरंतर चलती रहेगी।

इससे पहले, ‘भविष्य की अयोध्या - शासन और समाज’ विषय पर विचार विमर्श से हुआ। इसमें अयोध्या के भावी स्वरूप, उसके सांस्कृतिक एवं प्रशासनिक आयामों तथा समाज की भूमिका पर गंभीर चर्चा हुई। इस सत्र में सिद्धपीठ श्रीहनुमन्निवास, अयोध्या के आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव मनोज सिंह और पंच परमेश्वर विद्यापीठ के अध्यक्ष चंद्रशेखर प्राण ने अपने विचार प्रस्तुत करते हुए अयोध्या को एक आदर्श सांस्कृतिक-आध्यात्मिक नगर के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। वक्ताओं ने परम्परा और आधुनिकता के संतुलन को अयोध्या के भविष्य का मूल आधार बताया।

आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण ने कहा कि आज चिंता यह है। नगरीय अवस्थापना और नगर विकास की एक दृष्टि है। किसी भी भूगोल का विकास भारत में उसी दृष्टि से होता है। अयोध्या श्री राम के कारण जानी जाती है। श्री राम मंदिर के कारण नहीं जानी जाती है। जो मंदिर का मूल्य है, वह इसलिए है, क्योंकि वह राम की स्मृति को अक्षुण्ण करने में एक बड़ा उपादान है। उन्होंने कहा, अयोध्या परिभाषित होती है उस सनातन स्मृति से, जिसको हमारे पूर्वजों ने बचा करके रखा है। उन्होंने कहा, अयोध्या तो आश्रय है उनके लिए, जो सब छोड़ चुके हैं, वह अयोध्या आए। अयोध्या पाने के संघर्ष का नगर नहीं है। अयोध्या सब कुछ त्याग देने पर भी आपको हीन नहीं बनने देने की आत्मवत्ता का नगर है।

संध्या को आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत दुलाल राय द्वारा निर्देशित ‘श्री राम विजय’ की भव्य प्रस्तुति ने उपस्थित दर्शकों को भावविभोर कर दिया। संगीत नाटक अकादमी, गुवाहाटी के सौजन्य से प्रस्तुत इस कार्यक्रम में रामकथा के विभिन्न प्रसंगों का सजीव मंचन हुआ, जिसने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। तीन दिनों तक चले इस अयोध्या पर्व में देशभर से आए विद्वानों, कलाकारों, शोधकर्ताओं और श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

इस अवसर पर अयोध्या पर्व के संयोजक एवं फैज़ाबाद के पूर्व सांसद लल्लू सिंह, अयोध्या न्यास के सचिव राकेश सिंह और वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र पांडेय भी मंच पर उपस्थित रहे।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी

Powered By Sangraha 9.0