दिल्ली में प्रदूषण से निपटने के लिए नई तकनीक तैनात

06 Apr 2026 20:51:53
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा सहित अन्य अधिकारी मौजूद।


नई दिल्ली, 06 अप्रैल (हि.स.)। दिल्ली को प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने सोमवार को 'चैलेंज' के तहत चुनी गई 22 अत्याधुनिक तकनीकों के ट्रायल को हरी झंडी दे दी। इन ट्रायल की निगरानी आईआईटी दिल्ली जैसे संस्थान करेंगे ताकि दिल्ली की हवा को वैज्ञानिक और आधुनिक तरीके से स्वच्छ बना सकें।

इस ट्रायल की शुरुआत दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में की गयी। सिरसा ने दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी), नई दिल्ली नगर परिषद (एनडीएमसी), नगर निगम (एमसीडी), दिल्ली फायर सर्विस (डीएफएस), दिल्ली ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (डीटीआईडीसी) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग समेत कई प्रमुख विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने कहा, इन ट्रायल्स के लिए रसद, बिजली और अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी करने में कोई देरी नहीं होनी चाहिए। इन ट्रायल का समय पर पूरा होना बहुत जरूरी है ताकि दिल्ली को साफ हवा के लिए सही और काम करने वाले समाधान मिल सकें। उन्होंने कहा कि हर एजेंसी सिर्फ सहयोग देने वाली नहीं बल्कि दिल्ली की हवा बदलने के लिए एक वैज्ञानिक बदलाव की भागीदार है।

देशभर से प्राप्त 284 प्रविष्टियों में से विशेषज्ञों की कमेटी (आईटीईसी) ने 22 सबसे प्रभावी तकनीकों को चुना है, जिन्हें दो श्रेणियों में बांटा गया है।

वाहन प्रदूषण नियंत्रण (13 डिवाइस) के लिए गाड़ियों पर लगने वाले एयर फिल्टर, डस्ट कलेक्टर और पुराने डीजल वाहनों के लिए रेट्रोफिट एमिशन कंट्रोल डिवाइस शामिल हैं।

वातावरण सुधार (09 समाधान) के लिए सड़कों और डिवाइडर पर लगने वाले डस्ट कलेक्टर, विशाल एयर प्यूरीफायर और रेडियो वेव आधारित तकनीक शामिल है।

इन तकनीकों को दिल्ली के सबसे भीड़भाड़ वाले और संवेदनशील इलाकों में तैनात किया जाएगा। इनमें आईएसबीटी कश्मीरी गेट-लाल किला मैदान, पंजाबी बाग, कीर्ति नगर- रोहिणी, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र-दमकल स्टेशन शामिल हैं। इन ट्रायल्स की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए आईआईटी दिल्ली, एनपीएल और आईसीएटी जैसी संस्थाएं डेटा की निगरानी करेंगी। सरकार प्रति इनोवेशन लगभग 10 लाख तक का खर्च वहन करेगी। सफल होने वाले टॉप 3 नवाचारों को क्रमशः 50 लाख रुपये, 25 लाख रुपये और 10 लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा।

मई के अंत तक डेटा एकत्र किया जाएगा और जुलाई 2026 तक अंतिम सिफारिशें सरकार को सौंपी जाएंगी।

इस ट्रायल के बाद जो तकनीकें सफल पाई जाएंगी, उन्हें दिल्ली सरकार बड़े स्तर पर पूरे शहर में लागू करेगी। सरकार का लक्ष्य पीएम2.5 और पीएम10 के स्तर को कम कर दिल्ली की जनता को एक स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण प्रदान करना है।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी

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