

नई दिल्ली, 06 अप्रैल (हि.स)। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि पश्चिम एशिया संकट से प्रभावित क्षेत्रों को समर्थन देने के लिए भारत के पास पर्याप्त राजकोषीय गुंजाइश है। उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक के पास वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए ब्याज दरें घटाने की गुंजाइश है।
केंद्रीय वित्त मंत्री ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय लोक वित्त व नीति संस्थान (एनआईएफपी) के स्वर्ण जयंती समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। सीतारमण ने साफ किया है कि यह वर्ष कई बाहरी और आंतरिक चुनौतियों से भरा है, फिर भी दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत का कर्ज प्रबंधन सबसे बेहतर स्थिति में है। पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक अस्थिरता बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है। भारत का ऋण-जीडीपी अनुपात प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे कम 81 फीसदी है।
उन्होंने कहा कि मध्य-पूर्व में संघर्ष का बढ़ना अब सिर्फ एक क्षेत्रीय सुरक्षा चिंता तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा की अहम धमनियों के लिए खतरा बन गया है। इसके साथ ही यह नई बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की रूपरेखा को भी और ज़्यादा कठोर बना रहा है। वित्त मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि एक दशक पहले हमारी अर्थव्यवस्था 'कमजोर पांच' देशों में से एक थी, लेकिन हमने 21वीं सदी की दूसरी तिमाही की शुरुआत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के तौर पर की।
सीतारमण ने बताया कि हमने शुरुआत एक ऐसे राजकोषीय घाटे के साथ की थी, जो एक अस्थिर रास्ते पर था। अब हमने इसे सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.4 फीसदी तक ला दिया है और वित्त वर्ष 2030-31 तक इसे 50 फीसदी ऋण-से-जीडीपी अनुपात तक ले जाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि हमने केंद्रीय बजट की तारीख बदल दी। हमने तिमाही सीमाएं लागू कीं। हमने व्यापार से जुड़े अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया। इसके साथ ही हमने कर मूल्यांकन को 'फेसलेस' (बिना आमने-सामने आए) बना दिया।
वित्त मंत्री ने कहा कि हमने मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने का एक ढांचा तैयार किया है, उसे विश्वसनीय बनाने के लिए जरूरी संस्थागत स्वतंत्रता भी सुनिश्चित की। उन्होंने कहा कि ये कोई छोटी उपलब्धियां नहीं हैं। ये लोगों की सामूहिक समझ और नेतृत्व द्वारा लिए गए हजारों फैसलों का मिला-जुला नतीजा हैं। ऐसे लोग और नेतृत्व, जिन्होंने आसान रास्ता हमेशा उपलब्ध होने के बावजूद, ज्यादा मुश्किल लेकिन सिद्धांतों पर आधारित रास्ते को चुना।
वित्त मंत्री ने कहा कि 'विकसित भारत 2047' का सफ़र लंबा है और आगे की चुनौतियां हैं। भारत केवल आगे ही नहीं बढ़ रहा है, बल्कि भारत सही रास्ते पर है। भारत उन नई ऊंचाइयों को छूने के लिए पूरी तरह तैयार है, जो अब तक कभी नहीं देखी गई थीं। और एनआईपीएफपी जैसे संस्थान, इसके सबसे महत्वपूर्ण कारणों में से एक हैं। सीतारमण ने आगे कहा कि नीति आयोग का राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक (एफएचआई) 18 राज्यों का मूल्यांकन प्रमुख वित्तीय पैमानों पर करता है। उन्होंने कहा कि महत्वाकांक्षी श्रेणी के राज्यों को ढांचागत चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जैसे कि ज्यादा निश्चित खर्च, कम अपना राजस्व और कर्ज का दबाव है।
उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए ढांचागत सुधारों, समझदारी भरे वित्तीय प्रबंधन और मज़बूत राजस्व प्रणालियों की ज़रूरत होती है। इसके लिए ढांचागत समाधानों की ज़रूरत है, न कि सिर्फ़ केंद्र से मिलने वाले अतिरिक्त पैसों की। जब किसी राज्य की बैलेंस शीट मजबूत होती है, तो उसमें निजी साझेदारों के साथ मिलकर इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करने और ज़रूरी सेवाओं में कटौती किए बिना आर्थिक झटकों को झेलने की क्षमता होती है। एक विकसित भारत के लिए वित्तीय रूप से मजबूत राज्यों और जिलों की जरूरत है।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर