खरगे के विरुद्ध आरएसएस असम प्रांत की इकाइयों ने दिसपुर एवं सिलचर थाने में दर्ज कराई प्राथमिकी

08 Apr 2026 08:02:53
मल्लिकार्जुन खड़गे


गुवाहाटी, 08 (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की उत्तर असम प्रांत एवं दक्षिण असम प्रांत इकाइयों ने दक्षिण असम में आयोजित एक हालिया चुनावी रैली के दौरान कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के दिए गए कथित अपमानजनक, उकसावेपूर्ण एवं साम्प्रदायिक रूप से संवेदनशील बयानों के संबंध में विधिक कार्रवाई की मांग करते हुए क्रमशः गुवाहाटी स्थित दिसपुर पुलिस थाना तथा सिलचर पुलिस थाना में औपचारिक पुलिस शिकायत दर्ज कराई है।

प्रांत कार्यवाह खगेन सैकिया और प्रांत संघचालक ज्योत्स्नामय चक्रवर्ती द्वारा हस्ताक्षरित बयान में बताया गया है कि शिकायतों के अनुसार कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने श्रीभूमि जिले के करीमगंज दक्षिण विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत नीलामबाजार में आयोजित एक चुनावी सभा में विवादास्पद टिप्पणी की। आरोप है कि उन्होंने आरएसएस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की विचारधारा की तुलना “ज़हरीले सांप” से करते हुए उसके समाप्त किए जाने का आह्वान किया।

शिकायत में उद्धृत कथन के अनुसार खरगे ने कथित रूप से कहा: “यदि आप नमाज अदा कर रहे हों और आपके सामने एक जहरीला सांप आ जाए, तो आपको नमाज रोककर पहले उस सांप को मारने के लिए दौड़ना चाहिए, क़ुरान यही सिखाती है। मैं कहता हूं कि आरएसएस और भाजपा उसी जहरीले सांप की तरह हैं; यदि आप आरएसएस और भाजपा जैसे जहरीले सांप को समाप्त नहीं करेंगे, तो आप जीवित नहीं रह पाएंगे।”

बीती देररात जारी एक बयान में आरएसएस ने इस प्रकार के वक्तव्य पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि इस प्रकार की टिप्पणियां चुनावी अभियान के दौरान धार्मिक भावनाओं का उपयोग करते हुए आरएसएस एवं भाजपा के कार्यकर्ताओं और समर्थकों के विरुद्ध शत्रुता, भय तथा हिंसा को उकसा सकती हैं।

शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि यह बयान जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 83 के अंतर्गत भ्रष्ट चुनावी आचरण की श्रेणी में आता है तथा इससे जनता को आपराधिक रूप से भयभीत करने और विभिन्न राजनीतिक एवं सामाजिक समूहों के समर्थकों के बीच वैमनस्य फैलाने का प्रयास किया गया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि आरएसएस एवं भाजपा की विचारधारा को “जहरीला” बताना तथा उनके उन्मूलन की बात करना संगठन के सदस्यों एवं समर्थकों को शारीरिक क्षति पहुंचाने के लिए उकसाने के रूप में देखा जा सकता है।

एफआईआर में कहा गया है कि यह बयान हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच साम्प्रदायिक विभाजन को बढ़ावा देने का प्रयास प्रतीत होता है, जिससे असम में सार्वजनिक शांति एवं सौहार्द प्रभावित हो सकता है तथा चुनावी वातावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। शिकायतों में चेतावनी दी गई है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो इस प्रकार के वक्तव्य साम्प्रदायिक तनाव या टकराव का कारण बन सकते हैं।

आरएसएस ने बल देकर कहा है कि लोकतांत्रिक संवाद संवैधानिक एवं विधिक मर्यादाओं के भीतर रहना चाहिए तथा चुनावी राजनीति में ऐसी भाषा का प्रयोग नहीं होना चाहिए जो सामाजिक सद्भाव और सार्वजनिक शांति को खतरे में डाले।

हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय

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