अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों में अपनी भागीदारी तेज़ करे निजी क्षेत्र : डॉ. जितेन्द्र सिंह

09 Apr 2026 20:34:53
केन्द्रीय मंत्री


नई दिल्ली, 09 अप्रैल (हि.स.)। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने गुरुवार को कहा कि निजी क्षेत्र से अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों में अपनी भागीदारी तेज़ करने का आह्वान किया गया है। उन्होंने कहा कि भारत के नवाचार तंत्र को मजबूत बनाने के लिए उद्योग की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है।

नीति आयोग की दो रिपोर्ट्स

जारी करते हुए डॉ. जितेन्द्र सिंह ने बताया कि सरकार ने अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों को निजी भागीदारी के लिए खोलने सहित कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। साथ ही, शोध, विकास और नवाचार (आरडीआई ) फंड जैसे विशेष तंत्र भी बनाए गए हैं, ताकि निजी क्षेत्र को अनुसंधान में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने ज़ोर देकर कहा कि अब ध्यान केवल नीतियों के निर्माण पर नहीं, बल्कि उनके वास्तविक प्रभाव पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि शोधकर्ताओं को आने वाली व्यावहारिक समस्याओं को समझकर ही प्रभावी सुधार संभव है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत में वैज्ञानिक प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन प्रक्रियात्मक जटिलताएं और संस्थागत बाधाएं शोध के परिणामों को प्रभावित करती हैं। इसलिए फंडिंग तक आसान पहुंच, प्रशासनिक बाधाओं में कमी और परोपकार को बढ़ावा देना आवश्यक है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत के शोध पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने के लिए सरकार के साथ-साथ उद्योग, संस्थानों और समाज के सभी वर्गों की भागीदारी जरूरी है, ताकि अनुसंधान को वास्तविक उत्पादों और समाधानों में बदला जा सके।

नीति आयोग द्वारा जारी रिपोर्ट्स के अवसर पर उपाध्यक्ष सुमन बेरी ने कहा कि आर एंड डी प्रक्रियाओं को सरल बनाना वैज्ञानिक समुदाय की लंबे समय से मांग रही है। उन्होंने शोध प्रणाली में समन्वय और दक्षता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।

नीति आयोग के सदस्य वी. के. सारस्वत ने कहा कि भारत का अनुसंधान तंत्र एक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, जहां फंडिंग में देरी और प्रशासनिक अड़चनें अभी भी चुनौती बनी हुई हैं।

प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. ए. के. सूद ने कहा कि शोध को आसान बनाने के प्रयास लगातार जारी रहने चाहिए, क्योंकि अभी भी कई महत्वपूर्ण कमियां बनी हुई हैं।

रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि शोध प्रणाली में अधिक लचीलापन, पारदर्शिता और पूर्वानुमेयता लाना आवश्यक है, ताकि वैज्ञानिक बिना रुकावट के अपने कार्य को आगे बढ़ा सकें।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

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