एचएएल के 22वें चेयरमैन और सीएमडी बने रवि के, डॉ. डीके सुनील से चार्ज लिया

01 May 2026 16:10:53
डॉ. डी के सुनील से चार्ज लेते एचएएल के 22वें चेयरमैन और सीएमडी रवि के


- मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टर में 30 साल से ज्यादा कार्य करने का अनुभव

नई दिल्ली, 01 मई (हि.स.)। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) में शुक्रवार को 22वें चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर रवि के ने कार्यभार संभाला है। उन्होंने डॉ. डी के सुनील से चार्ज लिया है, जो 30 अप्रैल को सेवानिवृत्त हुए थे। श्री रवि के के पास मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टर में 30 साल से ज्यादा कार्य करने का अनुभव है। इससे पहले वह एचएएल में निदेशक (ऑपरेशंस) थे, जहां उन्होंने रणनीतिक योजना का नेतृत्व किया और एचएएल को महारत्न का दर्जा दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

कार्यभार संभालने के बाद रवि के. ने कहा कि उनका विजन एचएएल को इनोवेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ऑपरेशनल एक्सीलेंस और लोगों से चलने वाली एक ग्लोबल कॉम्पिटिटिव एयरोस्पेस और डिफेंस एंटरप्राइज में बदलना है। उन्होंने एलसीए तेजस डिवीजन के कार्यकारी निदेशक और महाप्रबंधक के साथ-साथ कार्यकारी निदेशक (कॉर्पोरेट प्लानिंग) जैसे अहम रोल में कार्य किया है। उन्होंने एचएएल के लिए कई बड़े कॉन्ट्रैक्ट पूरे किए, जैसे कि भारतीय वायु सेना के साथ 180 एलसीए तेजस आपूर्ति का समझौता करने, भारतीय सेना और वायु सेना के लिए 156 एलसीएच प्रचंड और वायु सेना में एलसीए तेजस फ्लीट संचालित करने का श्रेय उन्हें ही जाता है।

एचएएल के मुताबिक उन्होंने अलग-अलग ग्राहक केंद्रित पहलों के जरिए फ्लीट की सर्विस को बेहतर बनाया। वायु सेना बेस के साथ आसान डेटा कम्युनिकेशन बनाया और समय पर कस्टमर सपोर्ट के लिए सिंगल पॉइंट ऑफ कॉन्टैक्ट बनाया। उन्होंने एलसीए तेजस प्रोग्राम में तेजी लाने के लिए नासिक में निर्माण क्षमता बढ़ाकर स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है। कर्नाटक के मलनाड कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट श्री रवि के आईआईएम अहमदाबाद और आईएएस, टूलूज़, फ्रांस के पूर्व छात्र हैं। वे मल्टी-रोल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट लिमिटेड के बोर्ड में नामित निदेशक भी हैं।

उन्होंने प्राइवेट सेक्टर के साझेदारों के साथ बड़े फ्यूजलेज असेंबली आउटसोर्स करके मजबूत मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम बनाने में भी अहम भूमिका निभाई। यह एक ऐसी रणनीति है, जो अब लगातार डिलीवरी के जरिए अच्छे नतीजे दे रही है। उनकी कोशिशों ने एचएएल को सिविल मैन्युफैक्चरिंग और मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (एमआरओ) में अलग-अलग तरह से विस्तार मिला है, जिससे राजस्व के नए संसाधन बनने के साथ ही एचएएल की विमानन बाजार में मौजूदगी बढ़ी है।---------------------------

हिन्दुस्थान समाचार / सुनीत निगम

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