
नई दिल्ली, 12 मई (हि.स.)। उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने मंगलवार को कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित तकनीकें स्वास्थ्य सेवा समेत कई क्षेत्रों में बदलाव ला रही हैं, लेकिन कोई भी एआई मरीज के बिस्तर के पास डॉक्टर की मौजूदगी और मानवीय संवेदनाओं की जगह नहीं ले सकता।
उपराष्ट्रपति ने भारत मंडपम में आयोजित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली के 51वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए युवा डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों से अपने पेशे में सहानुभूति, ईमानदारी और मानवता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि एम्स अब केवल अंतरराष्ट्रीय मानकों का अनुसरण नहीं कर रहा, बल्कि स्वयं वैश्विक मानक स्थापित कर रहा है। राधाकृष्णन ने कहा कि एम्स ने चिकित्सा नवाचार, आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं और मरीजों की देखभाल के क्षेत्र में नई पहचान बनाई है, जबकि इसकी सेवाएं आम लोगों के लिए अब भी किफायती बनी हुई हैं।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि महामारी से निपटने से लेकर ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं तक, एम्स का नाम देश और दक्षिण-पूर्व एशिया में भरोसे और ईमानदारी का प्रतीक बन गया है।
उन्होंने इस वर्ष अंटार्कटिका में रिमोट रोबोटिक अल्ट्रासाउंड करने की एम्स की उपलब्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे यह साबित हुआ है कि भारतीय चिकित्सा उत्कृष्टता के लिए भौगोलिक सीमाएं अब बाधा नहीं रहीं। उन्होंने संस्थान के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय सहयोगों पर भी प्रकाश डाला, जिसमें 'स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई के लिए भारत-फ्रांस केंद्र' भी शामिल है।
राधाकृष्णन ने क्यूएस विश्व रैंकिंग का जिक्र करते हुए कहा कि एम्स ने दो वर्षों में 40 स्थानों की छलांग लगाकर वैश्विक स्तर पर 105वां स्थान हासिल किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि संस्थान जल्द ही शीर्ष 100 में शामिल होगा और भविष्य में दुनिया का नंबर एक संस्थान भी बन सकता है। उन्होंने कहा कि एम्स ने एनआईआरएफ की चिकित्सा श्रेणी में 2018 से 2025 तक लगातार शीर्ष स्थान बनाए रखा है।
संस्थान के फैकल्टी और शोधकर्ताओं की सराहना करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि एम्स की उत्कृष्टता उसके फैकल्टी सदस्यों को वर्षों से मिले अनेक पद्म पुरस्कारों में झलकती है। उन्होंने बताया कि इस प्रतिष्ठित सूची में दो पद्म विभूषण, 15 पद्म भूषण और 51 पद्म श्री पुरस्कार विजेता शामिल हैं, जबकि 57 फैकल्टी सदस्य स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के विश्व के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों में शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में एम्स संस्थानों के विस्तार से दूरदराज और वंचित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिली है।
स्नातक हो रहे छात्रों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि वे भारतीय स्वास्थ्य सेवा के एक निर्णायक मोड़ पर इस पेशे में प्रवेश कर रहे हैं, जब एक राष्ट्र, एक स्वास्थ्य की परिकल्पना एक अधिक एकीकृत, न्यायसंगत और भविष्य के लिए तैयार स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को आकार दे रही है। उन्होंने युवा डॉक्टरों, वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों से स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में करुणा, नवाचार और जन-विश्वास को बढ़ावा देने का आग्रह किया।
स्नातक होने वाले छात्रों को बधाई देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि वे जो व्हाइट कोट पहनते हैं, वह व्यक्तिगत सफलता से कहीं बढ़कर अपेक्षाओं का प्रतीक है। उन्होंने उनसे विनम्रता, उत्कृष्टता और सहानुभूति के साथ समाज की सेवा करने का आग्रह किया, और यह सुनिश्चित करने को कहा कि उनके काम में पेशेवर कौशल के साथ-साथ व्यापक भलाई के प्रति उनकी प्रतिबद्धता भी झलकती हो।
दीक्षांत समारोह में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और एम्स के अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा, एम्स निदेशक प्रो. निखिल टंडन, संस्थान की डीन प्रो. राधिका टंडन, रजिस्ट्रार प्रो. गिरिजा प्रसाद रथ सहित कई वरिष्ठ चिकित्सक, शिक्षक और छात्र मौजूद थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार