मध्य प्रदेश बना ‘गेहूं प्रदेश’, 365 लाख मीट्रिक टन उत्पादन के साथ देश में 18 फीसद हिस्सेदारी

12 May 2026 19:07:53
मध्य प्रदेश की मंडियों में गेहूं उपार्जन की तस्वीर


मध्य प्रदेश की मंडियों में गेहूं उपार्जन की तस्वीर


- शरबती और ड्यूरम गेहूं की वैश्विक मांग, 40 से अधिक देशों में हो रहा निर्यात

भोपाल, 12 मई (हि.स.)। प्रदेश की किसान हितैषी नीतियों के चलते मध्य प्रदेश का गेहूं उत्पादन 365.11 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया है और राज्य 18 फीसद हिस्सेदारी के साथ देश में “गेहूं प्रदेश” के रूप में उभरा है। शरबती और ड्यूरम जैसी उच्च गुणवत्ता वाली किस्मों की अंतरराष्ट्रीय मांग बढ़ने के साथ ही प्रदेश का गेहूं 40 से अधिक देशों में निर्यात हो रहा है।

जनसंपर्क अधिकारी क्रांतिदीप अलूने ने मंगलवार को जानकारी दी कि प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की किसान हितैषी नीतियों और योजनाओं के परिणाम स्वरूप इस साल गेंहू उत्पादन में उछाल आया है। उत्पादकता बढ़कर 3780 किलो प्रति हेक्टेयर हो गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में मध्य प्रदेश के गेंहूं की मांग लगातार बनी हुई है। प्राकृतिक मिठास के कारण शरबती और डयूरम गेंहू की मांग जर्मनी, अमेरिका, इटली, यूके, दुबई, साउथ अफ्रीका जैसे देशों में बनी हुई है।

उन्होंने बताया कि भारत से विदेशों को निर्यात किये जाने वाले गेहूं में मध्य प्रदेश का योगदान 35 से 40 प्रतिशत होता है। प्रदेश के गेहूं को ओमान, यमन, यूएई, साउथ कोरिया, कतर, बांग्लादेश, सउदी अरब, मलेशिया, साउथ अफ्रीका और इंडोनेशिया में पसंद किया जा रहा है। मध्य प्रदेश का गेहूं ब्रेड, बिस्किट और पास्ता के लिये सर्वाधिक उपयुक्त है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा गेंहू उत्पादक किसानों के हित में नई योजनाएं बनाने और समय पर मदद करने की रणनीति के फलस्वरूप मध्यप्रदेश ने परंपरागत गेहूं उत्पादक राज्यों की बराबरी कर ली है। वर्ष 2004–05 में सिर्फ 42 लाख हेक्टेयर में गेंहूं होता था। जो आज बढकर 96.58 लाख हेक्टेयर हो गया है।

क्या है मध्यप्रदेश के गेहूं में

जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि भारत सरकार के गेहूं अनुसंधान निदेशालय ने अपने अनुसंधान में दो हजार सेम्पल का परीक्षण करने के बाद उच्च स्तर की गुणवत्ता का दाना पाया। प्रदेश के सामान्य से सामान्य किस्म के गेहूं में भी औसत रूप से 12.6 प्रतिशत प्रोटीन, 43.6 पीपीएम (पार्टस पर मिलियन) आयरन तथा 38.2 पीपीएम जिंक पाया गया है। कठिया प्रजाति के गेहूं में भरपूर प्रोटीन, आयरन, मैग्नीज और जिंक है। इन्हीं विशेषताओं से मध्य प्रदेश के गेहूं को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में अच्छी कीमत मिलती है।

गौरतलब है कि प्रदेश में गेंहूं की जो किस्में उगाई जाती हैं उनकी अपनी विशेषताएं हैं, जैसे जे.डब्ल्यू.एस.17, जे.डब्ल्यू. 3020 और जे.डब्ल्यू. 321 नामक गेहूँ की किस्में-एक सिंचाई में 35 क्विंटल तक उत्पादन देती हैं। जे.डब्ल्यू. 1142, जे.डब्ल्यू. 3288 तथा जे.डब्ल्यू. 1203 किस्मों से अधिक तापमान में भी बेहतर उत्पादन मिलता है। जे.डब्ल्यू. 1202 और जे.डब्ल्यू. 3288 तथा जे.डब्ल्यू. 1106 किस्में प्रोटीन से भरपूर हैं। एमपीआर 1215 और जे.डब्ल्यू. 3211 किस्में निर्यात के लिये बेहतर है।

गेहूं की 51 किस्मों का विकास

जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि पौष्टिक आहार बनाने के लिये गेहूँ वर्ष 2026 में की जो पाँच किस्में उपयोग में आ रही हैं उनमें से चार मध्य प्रदेश में विकसित की गई हैं। इनमें एम.पी.ओ. 1215, एम.पी. 3211, एम.पी. 1202 एवं एम.पी. 4010 शामिल हैं। मध्यप्रदेश में अब तक गेहूँ की 51 किस्मों का विकास हुआ है। इनमें से 12 किस्मों का विकास सिर्फ एक दशक की अल्प अवधि में हुआ है।

100 लाख मीट्रिक टन उपार्जन

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के आग्रह पर गेहूं खरीदी का लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 100 लाख मीट्रिक टन हो गया है। प्रदेश में गेंहू का उपार्जन जारी है। किसानों के लिए उपार्जन केन्द्रों में पूरे इंतजाम किए गये हैं। गेहूं उपार्जन 23 मई तक चलेगा। किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का उपार्जन किया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश देश का सबसे बडा प्रामाणिक बीज उत्पादक राज्य भी है। सहकारी क्षेत्र में बीज उत्पादन में पूरी तरह आत्मनिर्भर हो गया है। बीज उत्पादन कंपनियों से तीन लाख से ज्यादा किसान जुडे हैं। ये कंपनियां अब भंडारण विपणन और खादय प्रसंस्करण से भी जुड़ रही हैं। फार्मर प्रोडयूसर कंपनियों को और ज्यादा मजबूत बनाया जा रहा है। इन सभी गतिविधियों से मध्यप्रदेश न केवल गेहूं बल्कि अन्य फसलों के उत्पादन में राष्ट्र में अग्रणी बना हुआ है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उम्मेद सिंह रावत

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