
नई दिल्ली, 13 मई (हि.स)। रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी) ने बुधवार को कहा कि सोने पर आयात शुल्क बढ़ाने से आयात पर अंकुश नहीं लगता, बल्कि कीमतें बढ़ती हैं। परिषद ने इसके स्थायी समाधान के लिए केंद्र सरकार से उद्योग के हितधारकों के साथ बातचीत करने की अपील की है।
जीजेईपीसी ने बुधवार को एक बयान में कहा कि आयात शुल्क बढ़ाने से शायद ही कभी सोने का आयात घटता है। यह केवल कीमतें बढ़ाता है। हाल के समय में सोने की कीमतें दोगुनी होने के बावजूद आयात उसी अनुपात में नहीं घटा है। परिषद के अनुसार उच्च शुल्क तस्करी को बढ़ावा देते हैं और निर्यात लागत बढ़ाते हैं। वहीं, निर्यातकों को अब नामित एजेंसियों से शुल्क-मुक्त सोना खरीदने पर प्रति किलोग्राम 28-30 लाख रुपये की बैंक गारंटी देनी पड़ रही है, जिससे कार्यशील पूंजी बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
जीजेईपीसी ने बताया कि इसका सबसे गंभीर असर सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) विनिर्माताओं पर पड़ेगा। बयान में कहा गया है कि परिषद में ऐसे 80 फीसदी सदस्य हैं जो ‘‘गंभीर नकदी संकट’’ का सामना कर रहे हैं।
सरकार ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क छह फीसदी से बढ़ाकर आज 15 फीसदी कर दिया। प्लैटिनम पर कर 6.4 फीसदी से बढ़ाकर 15.4 फीसदी कर दिया गया है। इसके परिणामस्वरूप सोने/चांदी के डोरे, सिक्के, अन्य वस्तुएं आदि पर भी कर में बदलाव किए गए हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर