
- मप्र में प्रधानमंत्री की सादगी वाली अपील के बीच मोहन सरकार का बड़ा संदेश, सत्ता में दिखावे पर सख्त कार्रवाई
भोपाल, 14 मई (हि.स.)। मध्यप्रदेश की राजनीति में शक्ति प्रदर्शन और वीआईपी संस्कृति पर बड़ा प्रहार करते हुए राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम के नव नियुक्त अध्यक्ष सौभाग्य सिंह ठाकुर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। उज्जैन से भोपाल तक लगभग 200 गाड़ियों के काफिले के साथ पदभार ग्रहण करने पहुंचे ठाकुर को मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया है। साथ ही मामले के निराकरण तक उनके सभी प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए गए हैं। अब मप्र में मोहन सरकार की इस कार्रवाई को राजनीतिक और सामाजिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि इस संबंध में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि राष्ट्रहित में जारी दिशा-निर्देशों और अपीलों का संयमपूर्ण पालन नहीं करने के मामले को गंभीरता से लिया गया है। सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों में सौभाग्य सिंह ठाकुर के निगम कार्यालय या परिसर में प्रवेश पर रोक भी शामिल है। इसके अलावा वे निगम की किसी भी सुविधा, वाहन, कर्मचारी अथवा कार्यालय संसाधनों का उपयोग नहीं कर सकेंगे।
बैठकों और निर्णयों से भी दूर
सरकार ने केवल प्रतीकात्मक कार्रवाई तक खुद को सीमित नहीं रखा। आदेश के अनुसार ठाकुर निगम से संबंधित किसी भी बैठक में भाग नहीं ले सकेंगे और न ही किसी बैठक की अध्यक्षता कर पाएंगे। इसके साथ ही उन्हें किसी भी प्रशासनिक या वित्तीय निर्णय में हस्ताक्षर अथवा सहभागिता से पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। निगम कर्मचारियों को किसी प्रकार के निर्देश जारी करने पर भी रोक लगा दी गई है। यानी मामले के निराकरण तक अध्यक्ष पद पर रहते हुए भी वे व्यवहारिक रूप से किसी अधिकार का उपयोग नहीं कर पाएंगे।
200 गाड़ियों का काफिला बना चर्चा का विषय
दरअसल, हाल ही में सौभाग्य सिंह ठाकुर उज्जैन से भोपाल पदभार ग्रहण करने के लिए पहुंचे थे। इस दौरान उनके समर्थन में बड़ी संख्या में वाहन शामिल हुए। बताया गया कि काफिले में करीब 200 गाड़ियां थीं। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक यह मामला तेजी से चर्चा में आ गया। विपक्ष ने इसे सत्ता के दुरुपयोग और दिखावे की राजनीति से जोड़कर सवाल उठाए, वहीं सरकार के भीतर भी इसे लेकर असहजता दिखाई दी।
प्रधानमंत्री की अपील से जुड़ा मामला
इस पूरे घटनाक्रम को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की हालिया अपील से जोड़कर देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री ने 10 मई को हैदराबाद में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम में नागरिकों से सादगी और आर्थिक अनुशासन अपनाने का आह्वान किया था। उन्होंने कहा था कि अनावश्यक सोने की खरीदारी, गैर-जरूरी विदेश यात्राएं और दिखावटी खर्चों को टालना चाहिए। साथ ही सार्वजनिक परिवहन, कार पूलिंग, ऑनलाइन बैठकों और ईंधन बचत को बढ़ावा देने की बात कही थी।
ऐसे समय में सैकड़ों वाहनों के काफिले के साथ शक्ति प्रदर्शन को सरकार ने गंभीरता से लिया और यह संदेश देने का प्रयास किया कि सार्वजनिक जीवन में बैठे लोगों के लिए अनुशासन और जिम्मेदारी सर्वोपरि है।
राजनीतिक गलियारों में बड़ा संकेत
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कार्रवाई केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है। इसे सरकार की ओर से सत्ता और संगठन से जुड़े लोगों को स्पष्ट चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है कि सार्वजनिक जीवन में सादगी और अनुशासन की अपेक्षा अब सिर्फ भाषणों तक सीमित नहीं रहेगी। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अक्सर राजनीतिक नियुक्तियों के बाद शक्ति प्रदर्शन को सामान्य मान लिया जाता रहा है। लेकिन इस कार्रवाई ने संकेत दिया है कि सरकार अब ऐसे आयोजनों पर सख्त नजर रख सकती है।फिलहाल पूरे मामले में सौभाग्य सिंह ठाकुर की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी