रॉश फार्मा इंडिया ने फेफड़ों के कैंसर के लिए सबक्यूटेनियस इम्यूनोथेरेपी की लॉन्च

14 May 2026 18:06:53
सबक्यूटेनियस इम्यूनोथेरेपी की लॉन्च का फोटो


सबक्यूटेनियस इम्यूनोथेरेपी की लॉन्च का फोटो


नई दिल्ली, 14 मई (हि.स)। फार्मास्युटिकल क्षेत्र की बड़ी कंपनियों में शामिल रॉश फार्मा इंडिया ने गुरुवार को भारत में इम्यूनोथेरेपी दवा टेसेंट्रिक को यहां लॉन्च किया। टेसेंट्रिक (एटजोलिजुमैब) एससी से फेफड़ों के कैंसर की इम्यूनोथेरेपी देने का समय घंटों से घटकर सिर्फ सात मिनट रह जाएगा।

कंपनी ने बताया कि यह पहली बार है जब इस दवा को त्वचा के नीचे दिया जा सकेगा, जिससे दवा देने का समय घटकर सिर्फ सात मिनट रह जाएगा। इसकी तुलना में पारंपरिक इंट्रावीनस इन्फ्यूजन में कम से कम दो घंटे लगते हैं। हालांकि यह आराम काफी महंगा पड़ता है, क्योंकि एक वायल (शीशी) की अधिकतम खुदरा कीमत (एमआरपी) लगभग 3.7 लाख रुपये है। ये दवा एक मरीज को औसतन लगभग छह साइकल की ज़रूरत पड़ सकती है।

रॉश फार्मा इंडिया के मुताबिक यह देश की पहली सबक्यूटेनियस (त्वचा के नीचे दी जाने वाली) लंग कैंसर इम्यूनोथेरेपी है, जिसे लगभग सात मिनट में दिया जा सकता है। वहीं, पारंपरिक आईवी इन्फ्यूजन में कई घंटे लग जाते हैं। कैंसर के इलाज में लगने वाले समय को घटाकर मात्र 7 मिनट करते हुए टिसेंट्रिक एससी एक क्रांतिकारी इनोवेशन है, जो इसके मरीजों के इलाज के अनुभव को काफी बेहतर बना सकता है। साथ ही यह इलाज के समय को लगभग 80 प्रतिशत तक कम करता है, इलाज से संबंधित अप्रत्यक्ष खर्च घटाता है और इलाज के लिए लंबे सफर की जरूरत को कम करता है।

टेसेंट्रिक एससी की लॉन्चिंग के अवसर पर रॉश फार्मा इंडिया के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एवं एमडी राजविंदर (राज्जी) मेहदवान ने कहा, “रॉश में हम भारत में ऐसे सार्थक इनोवेशन लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो न केवल क्लीनिकल परिणामों को बेहतर बनाते हैं, बल्कि इलाज से संबंधित व्यापक चुनौतियों को भी दूर करते हैं। उन्होंने कहा कि टिसेंट्रिक एससी की लॉन्चिंग एडवांस्ड कैंसर केयर तक पहुंच को बेहतर बनाने के प्रति हमारी निरंतर प्रतिबद्धता को दिखाती है।

राजविंदर मेहदवान ने कहा कि इससे मरीज एवं उनकी देखभाल करने वालों को अस्पताल में कम समय बिताना पड़ता है और जिंदगी को अपनी पसंद से जीने का ज्यादा वक्त भी मिलता है। इंट्रावीनस इनफ्यूजन में 1 मरीज पर जितना समय लगता है, उतने समय में 5 मरीजों का इलाज हो सकेगा, इससे हेल्थकेयर संसाधनों का बेहतर प्रयोग करने में मदद मिलेगी। 85 देशों में इसे मान्यता मिली है, जबकि दुनियाभर में 10,000 से ज्यादा मरीज इसका फायदा ले चुके हैं।

उन्होंने कहा कि टिसेंट्रिक एससी दुनिया का पहला और एकमात्र पीडी-(एल)1 इनहिबिटर है, जो कई तरह के कैंसर के उपचार के लिए इंट्रावीनस (आईवी) और सबक्यूटेनियस (एससी) दोनों रूपों में उपलब्ध है। इसे सबसे पहले 2023 में एमएचआरए से और उसके बाद 2024 में यूएसएफडीए से मंजूरी मिली थी। क्लीनिकल अध्ययनों से पता चला है कि यह आईवी टिसेंट्रिक जितना ही असरदार और सुरक्षित है। भारत में टिसेंट्रिक एससी को अभी तक डीसीजीआई द्वारा एडजुवेंट एंड मेटास्टेटिक लंग कैंसर (एनएससीएलसी) के इलाज के लिए मंजूरी मिली है।

रॉश फार्मा इंडिया के चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ. सिवाबालन सिवानेसन ने कहा, “कैंसर का इलाज अब सिर्फ मरीज को जीवित रखने तक केंद्रित नहीं रह गया है, बल्कि अब ऐसे तरीकों पर जोर दिया जा रहा है, जो मरीज के अनुभव, सुविधा और जीवन की गुणवत्ता को भी प्राथमिकता देते हैं। उन्होंने कहा कि टिसेंट्रिक एससी के साथ हम एक ऐसा इनोवेशन ला रहे हैं जो इलाज के समय को काफी हद तक कम कर देता है। साथ ही इससे टिसेंट्रिक का पहले से प्रमाणित प्रभाव एवं सेफ्टी प्रोफाइल भी बना रहता है। हमारा मानना है कि इस तरह की तरक्की भारत में ज्यादा पेशेंट-सेंट्रिक एवं फ्यूचर-रेडी कैंसर केयर डिलीवरी में अहम भूमिका निभा सकती है।”

इस अवसर पर मेदांता में मेडिकल ऑन्कोलॉजी के प्रमुख एवं डायरेक्टर डॉ. सज्जन राजपुरोहित ने कहा, “इम्यूनोथेरेपी से कैंसर के मरीजों के इलाज में क्रांतिकारी बदलाव आया है, लेकिन पारंपरिक आईवी एडमिनिस्ट्रेशन लंबा एवं कष्टदायक होता है। इससे टर्शरी केयर हॉस्पिटल्स पर बहुत दबाव पड़ता है। बार-बार अस्पताल जाना और इलाज में लंबा समय लगना इलाज के भावनात्मक एवं शारीरिक दबाव को और बढ़ा देता है। सबक्यूटेनियस एडमिनिस्ट्रेशन से रोगियों का इलाज बहुत जल्दी और आसानी से किया जा सकता है। इससे इलाज का उनका समग्र अनुभव बेहतर होता है, प्रतीक्षा में लगने वाला समय कम होता है और उपचार मिलने में कम देरी होती है।”

मणिपाल हॉस्पिटल, बेंगलुरु में मेडिकल ऑन्कोलॉजी के कंसल्टेंट एवं एचओडी डॉ. अमित रौथन ने वीडियों कांफ्रेंसिंग के जरिए अपने संबोधन में कहा, “भारत में कैंसर के बढ़ते दबाव को देखते हुए जरूरी है कि हम मरीजों को इलाज देने के तरीके के बारे में फिर से सोचें। सबक्यूटेनियस इम्यूनोथेरेपी जैसे इनोवेशन से इलाज देने का तरीका आसान बनता है, हॉस्पिटल बेड पर दबाव कम होता है और मेट्रो शहरों के बड़े अस्पतालों से बाहर इलाज के ज्यादा विकेंद्रीकृत मॉडल को बढ़ावा मिल सकता है। कम समय में इलाज के तरीके से इलाज तक पहुंच को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। इससे कैंसर केयर को मरीजों एवं हेल्थकेयर सिस्टम, दोनों के लिए ज्यादा व्यावहारिक बनाया जा सकता है।”

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

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