जेम ने डिजिटल खरीद के नौ साल पूरे किए, एमएसएमई और स्टार्टअप्स के लिए समावेश को दिया बढ़ावा

16 May 2026 18:24:53
गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस के लोगो का प्रतीकात्मक चित्र


नई दिल्ली, 16 मई (हि.स)। गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम) ने शनिवार को अपना 'स्थापना दिवस 2026' मना रहा है। अपने गठन के 9 वर्ष पूरे कर रहा जेम देश में पारदर्शिता, दक्षता और प्रौद्योगिकी-आधारित शासन के जरिए सार्वजनिक खरीद प्रणाली को मजबूत, प्रतिस्पर्धी तथा किफायती बनाने के साथ आज देश में एक प्रमुख ई-वाणिज्य मंच बन कर उभरा है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने जारी एक बयान में बताया कि जेम ने 16 मई को अपना स्थापना दिवस 2026 मनाया, जिसमें पूरे भारत में घरेलू उद्यमों के लिए सार्वजनिक खरीद को अधिक पारदर्शी, कुशल और समावेशी बनाने में अपनी बढ़ती भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया। इस समारोह का शुभारंभ 15 मई, 2026 को जेम विक्रेता मूल्यांकन कार्यशाला के साथ हुआ, जिसका उद्देश्य संभावित ओईएम के लिए विक्रेता मूल्यांकन प्रक्रिया और दस्तावेज़ीकरण आवश्यकताओं के बारे में स्पष्टता बढ़ाना था।

इसके अलावा, जेम 21 मई 2026 को जेम को समृद्ध बनाना विषय के तहत जेम मंथन का आयोजन करेगा, जिसका उद्देश्य जेम तंत्र को मजबूत करने पर चर्चा को प्रोत्साहित करना है। जेम 22 मई 2026 को रक्षा सेवाओं के प्रतिनिधियों के साथ एक विचार-विमर्श सत्र का भी आयोजन करेगा जिसमें रक्षा खरीद और परिचालन आवश्यकताओं के साथ तालमेल को मजबूत करने के उद्देश्य से प्रक्रिया सुधार और तकनीकी उपायों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

मंत्रालय ने कहा कि इस अवसर पर भारत की सार्वजनिक खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता, दक्षता और प्रौद्योगिकी-आधारित शासन को बढ़ावा देने में जीईएम की निरंतर भूमिका को रेखांकित किया गया। यह पारदर्शिता, दक्षता और प्रौद्योगिकी-संचालित शासन के माध्यम से भारत में सार्वजनिक खरीद के सहयोग में इसकी निरंतर भूमिका को दर्शाता है। आज इस प्लेटफॉर्म पर 1.36 लाख से अधिक सरकारी खरीदार और लगभग 25 लाख विक्रेता एवं सेवा प्रदाता मौजूद हैं, जिनमें से लगभग 72 फीसदी सक्रिय विक्रेता सूक्ष्म एवं लघु उद्यम से हैं।

वाणिज्य मंत्रालय ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान जेम पर मौजूद 11 लाख से अधिक एमएसई को 2.36 लाख करोड़ रुपये मूल्य के 51 लाख से अधिक ऑर्डर प्राप्त हुए हैं। वहीं, महिला नेतृत्व वाले एमएसई को 28,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के खरीद ऑर्डर मिले, जबकि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों को 6,000 करोड़ रुपये से अधिक के ऑर्डर प्राप्त हुए। इस प्लेटफॉर्म पर मौजूद स्टार्टअप्स को 19,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के ऑर्डर मिले, जो उद्यमिता को बढ़ावा देने और सरकारी खरीद तक पहुंच बढ़ाने में जेम की भूमिका को दर्शाता है।

जेम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मिहिर कुमार ने कहा, “जेम की स्थापना सरकार और उसकी एजेंसियों के लिए एक पारदर्शी, कुशल और समावेशी डिजिटल खरीद मंच बनाने की परिकल्पना के साथ की गई थी। उन्होंने कहा कि आज जेम घरेलू उद्यमों को खरीद के अवसरों से जोड़कर आत्मनिर्भर भारत और वोकल फॉर लोकल अभियान को निरंतर बढ़ावा दे रहा है।” जेम निगमन दिवस समारोह के उपलक्ष्य में हितधारकों के साथ जुड़ाव और ज्ञान साझा करने संबंधी कई पहल आयोजित कर रहा है।

वाणिज्य मंत्रालय के अधीन धारा 8 के तहत गैर-लाभकारी संस्था, गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस स्पेशल पर्पस व्हीकल (जेम एसपीवी) को जेम प्लेटफॉर्म के विकास, प्रबंधन और रखरखाव के लिए कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत 17 मई 2017 को स्थापित किया गया था। वर्षों से, जेम एक प्रमुख डिजिटल सार्वजनिक खरीद मंच के रूप में उभरा है, जो देश भर के विक्रेताओं के लिए व्यापार में सुगमता और व्यापक बाजार पहुंच को बढ़ावा देता है।

उल्लेखनीय है कि गवर्नमेंट ई मार्केटप्लेस (जेम) आत्मनिर्भर भारत, वोकल फॉर लोकल और विकसित भारत 2047 की परिकल्पना के अनुरूप स्थानीय क्षमताओं को सरकारी खरीद के अवसरों से जोड़कर घरेलू उद्यमों को लगातार बढ़ावा दे रहा है। इस प्लेटफॉर्म पर फार्मास्यूटिकल्स, परिवहन, निर्माण उपकरण, फर्नीचर, वस्त्र और चिकित्सा वस्तुओं जैसे विभिन्न क्षेत्रों के प्रथम श्रेणी के स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं की भागीदारी देखी गई है।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

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