सिंधु जल पर मध्यस्थता न्यायालय अवैध, फैसले का कोई मतलब नहींः भारत

16 May 2026 18:34:53

नई दिल्ली, 16 मई (हि.स.)। भारत ने सिंधु जल से संबंधित मध्यस्थता न्यायालय (सीओए) के फैसले को खारिज करते हुए कहा कि उसने इसे कभी मान्यता नहीं दी है। इसका अर्थ है कि उसकी ओर से जारी कोई भी कार्यवाही, फैसला या निर्णय अमान्य है। पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का भारत का निर्णय अभी भी लागू है।

मीडिया के सवालों के जवाब में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शनिवार को कहा कि 15 मई को अवैध रूप से गठित तथाकथित मध्यस्थता न्यायालय ने सिंधु जल संधि की व्याख्या से जुड़े मामले में एक अतिरिक्त फैसला जारी किया। यह फैसला परियोजनाओं में पानी के अधिकतम भंडारण से संबंधित मुद्दे पर दिया गया है।

उन्होंने कहा कि भारत इस तथाकथित फैसले को पूरी तरह से खारिज करता है, ठीक उसी तरह जैसे उसने अवैध रूप से गठित सीओए के सभी पिछले फैसलों को दृढ़ता से खारिज किया है। भारत ने इस तथाकथित सीओए की स्थापना को कभी मान्यता नहीं दी है।

उल्लेखनीय है कि भारत ने अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था। यह संधि 19 सितंबर 1960 को भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई थी।

संधि के तहत- पूर्वी नदियों (रावी, व्यास, सतलज) का पानी भारत के उपयोग के लिए है, जबकि पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम, चिनाब) का पानी पाकिस्तान को आवंटित किया गया था।

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हिन्दुस्थान समाचार / अनूप शर्मा

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