छग के दंतेवाड़ा में डीजल नहीं मिलने से लौह अयस्क से भरे करीब 1600 ट्रकाें के पहिए थमे

युगवार्ता    17-May-2026
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बस्तर परिवहन संघ के अध्यक्ष प्रदीप पाठक एवं कताराें में खड़ी वाहन


दंतेवाड़ा, 17 मई (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिला स्थित देश की प्रमुख लौह अयस्क परियोजना एनएमडीसी बैलाडीला में डीजल की किल्लत से परिवहन व्यवस्था लगभग ठप पड़ गई है। किरंदुल और बचेली क्षेत्र में लगभग 1600 ट्रक पिछले दो दिनों से डीजल के अभाव में खड़े हैं। इससे लौह अयस्क की ढुलाई पूरी तरह प्रभावित हो गई है। स्थानीय प्रशासन ने भी डीजल की कमी को स्वीकारा है, लेकिन आज शाम तक व्यवस्था के सुचारु होने का दावा किया है।

दंतेवाड़ा की किरंदुल और बचेली खदानों में ट्रकों में लौह अयस्क की लोडिंग तो हो रही है, लेकिन डीजल नहीं मिलने के कारण वाहन रवाना नहीं हो पा रहे हैं। देश की नवरत्न कंपनियों में से एक एनएमडीसी की दंतेवाड़ा के किरंदुल, बैलाडिला स्थित लौह अयस्क खदान देश की सबसे बड़ी खदानों में गिनी जाती हैं। यहां से प्रति दिन लाखों टन लौह अयस्क का परिवहन सैकड़ों ट्रकों के माध्यम से रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़ और विशाखापट्टनम के लिए जाते हैं, लेकिन अब इन वाहनों की ट्रांसपोर्ट नगरों के साथ-साथ सड़क के दोनों ओर लंबी कतारें दिखाई दे रही हैं। इसका कारण वाहनों

में डीजल नही होना बताया जा रहा है।

दंतेवाड़ा जिले के 19 पेट्रोल पंपों में से केवल कुछ पर ही सीमित मात्रा में डीजल उपलब्ध है, जिनके द्वारा सीमित मात्रा में ही पेट्रोल-डीजल उपलब्ध करवाया जा रहा है। ईंधन भरवाने के लिए ट्रकों, ट्रैक्टरों और अन्य वाहनों की लंबी कतारें लगी हैं। घंटों इंतजार के बाद भी कई बार खाली लौटना पड़ रहा है। डीजल की किल्लत की वजह से पिछले 2 दिनों से लौह अयस्कों की ढुलाई बंद हो चुकी है। इसके चलते बैलाडिला ट्रक यूनियन और बस्तर परिवहन संघ के सैकड़ों से अधिक ट्रकों के पहिये थमने की कगार पर पहुंच चुके हैं। हालत यह है कि रायपुर ट्रक यूनियन की भी सैकड़ों ट्रकें डीजल की किल्लत की वजह से ट्रांसपोर्ट नगरों में खड़े हैं।

ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि अगर जल्द डीजल आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो एनएमडीसी और बैलाडीला ट्रक ऑनर्स परिवहन संघ को करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है। एक ट्रांसपोर्टर ने बताया कि दो दिनों से ट्रक खड़े हैं। डीजल नहीं मिलने से पूरा परिवहन प्रभावित है। हालात जल्द नहीं सुधरे तो बड़ा नुकसान तय है।

डीजल संकट से सिर्फ उद्योग ही नहीं, खेती भी प्रभावित हो रही है। किसान ट्रैक्टर लेकर पंपों के चक्कर काट रहे हैं। खरीफ सीजन में डीजल नहीं मिलने से जुताई-बुआई का काम रुक गया है। किसानों का कहना है कि घंटों लाइन में लगने के बाद भी पर्याप्त डीजल नहीं मिल पा रहा। किसान पिनाक पांडेय और सोन साय कश्यप कहना है कि डीजल की कमी से क्षेत्र के किसानों को भी परेशानी हो रही है। हालात गंभीर दिख रहे हैं हालांकि प्रशासन स्थिति सामान्य करने के प्रयास कर रहा है।

बस्तर में सबसे बड़े बस्तर परिवहन संघ के अध्यक्ष प्रदीप पाठक का कहना है कि अगर कुछ दिनों तक यही हाल रहा तो परिवहन क्षेत्र से जुड़े ट्रांसपोर्टरों को परिवार पालना मुश्किल हो जाएगा। क्योंकि लौह अयस्क तो काफी आसानी से मिल जा रहा है, लेकिन माल को समय पर पहुंचाने में परेशानी हो रही है। क्योंकि एक समय पर भरपूर डीजल नहीं मिल रहा है। 300 किलोमीटर के सफर में करीब 4-5 पेट्रोल पम्पों में लाइन लगाकर डीजल भरवाना पड़ रहा है, जिससे बहुत समय भी खराब हो रहा है। माइनिंग विभाग द्वारा तय समय-सीमा पर माल नही पहुंचता है तो जीएसटी विभाग उस पर चालानी कार्रवाई करता है। सरकार से आग्रह है कि ऐसे समय में उन्हें समय की राहत मिलनी चाहिए।

पेट्रोल पंप संचालक राजेंद्र पांडे का कहना है कि पेट्रोल पंप में पेट्रोल -डीजल की नियमित सप्लाई की व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण लोगों की भीड़ पेट्रोल पम्पों में उमड़ पड़ी है। उन्हें जितना पेट्रोल-डीजल उपलब्ध हो रहा है, उसे लोगों को वितरित किया जा रहा है।

इस संबंध में दंतेवाड़ा के अपर जिलाधिकारी राजेश पात्रे ने हिन्दुस्थान समाचार को बताया कि जिले में कुछ जगहों पर डीजल पेट्रोल की कुछ कमी थी, उसे पूरा कर दिया गया है, जहां तक किरंदुल की बात है तो वहां भी आज शाम तक व्यवस्था को बहाल कर दिया गया है। डीजल की आपूर्ति होने लगी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे

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