प्रधानमंत्री मोदी ने नीदरलैंड के ऐतिहासिक बांध का किया दौरा, जल प्रबंधन मॉडल को सराहा

युगवार्ता    17-May-2026
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नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन के साथ अफ़्सलुइटडिज्क बांध परियोजना का अवलोकन करते प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी।


नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन के साथ अफ़्सलुइटडिज्क बांध परियोजना का अवलोकन करते प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी।


नई दिल्ली, 17 मई (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पांच देशों की छह दिवसीय यात्रा के तीसरे दिन नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन के साथ नीदरलैंड के ऐतिहासिक अफ़्सलुइटडिज्क बांध का दौरा किया। इस दौरान दोनों नेताओं ने जल प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण और समुद्री जल को रोककर भूमि तथा मीठे पानी के संसाधनों के विकास से जुड़ी परियोजनाओं की जानकारी ली।

प्रधानमंत्री ने इसकी जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर साझा करते हुए कहा कि जल संसाधन प्रबंधन ऐसा क्षेत्र है, जिसमें नीदरलैंड ने अग्रणी कार्य किया है और पूरा विश्व उससे बहुत कुछ सीख सकता है। उन्होंने कहा कि उन्हें अफ़्सलुइटडिज्क परियोजना की प्रमुख विशेषताओं को समझने का अवसर मिला और इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री रॉब जेटन का आभार व्यक्त किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण और अंतर्देशीय जलमार्ग नेटवर्क के विस्तार के उद्देश्य से आधुनिक प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। जल प्रबंधन के क्षेत्र में भारत और नीदरलैंड के बीच सहयोग को और मजबूत किया जा सकता है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी इसे महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने एक्स पर लिखा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री रॉब जेटन के साथ अफ़्सलुइटडिज्क बांध का दौरा किया, जो जल प्रबंधन, बाढ़ सुरक्षा और मीठे पानी के भंडारण में डच इंजीनियरिंग उत्कृष्टता और नवाचार का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि यह दौरा गुजरात की कल्पसर परियोजना के लिए भी महत्वपूर्ण है, जिसका उद्देश्य खंभात की खाड़ी के निकट मीठे पानी का विशाल भंडार और बांध विकसित करना है। इससे जलवायु अनुकूलन, जल प्रौद्योगिकी और सतत अवसंरचना के क्षेत्र में भारत-नीदरलैंड सहयोग की नई संभावनाओं को भी बल मिलेगा।

उल्लेखनीय है कि अफ़्सलुइटडिज्क नीदरलैंड का प्रमुख बांध और पुल है, जिसका निर्माण वर्ष 1927 से 1932 के बीच किया गया था। यह लगभग 32 किलोमीटर लंबा बांध उत्तरी हॉलैंड के डेन ओएवर को फ्रीसलैंड प्रांत के ज्यूरिख गांव से जोड़ता है। इस बांध ने उत्तरी सागर की खारे पानी की खाड़ी ज़ुइडरज़ी को बंद कर उसे आईजेलमीर नामक मीठे पानी की विशाल झील में परिवर्तित कर दिया।

यह परियोजना नीदरलैंड की सबसे महत्वपूर्ण जल प्रबंधन और भूमि सुधार योजनाओं में मानी जाती है। अफ़्सलुइटडिज्क बांध के निर्माण के बाद समुद्री बाढ़ के खतरे में कमी आई और कृषि, पेयजल तथा परिवहन के लिए नई संभावनाएं विकसित हुईं। यह बांध देश के उत्तर और पश्चिमी हिस्सों के बीच सड़क संपर्क का भी प्रमुख माध्यम है।

वर्ष 1953 में उत्तरी सागर में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद इस बांध की ऊंचाई कई चरणों में बढ़ाई गई। वर्ष 2019 में इसके व्यापक आधुनिकीकरण और सुदृढ़ीकरण का कार्य भी शुरू किया गया, ताकि समुद्री तूफानों और जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों का सामना किया जा सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर

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