
नई दिल्ली, 18 मई (हि.स)। सरकार ने सोमवार को कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट के बावजूद पूरे देश में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और नेचुरल गैस का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। केंद्र ने कहा कि एलपीजी वितरकों, रिटेल आउटलेट्स या उपभोक्ताओं को घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है, क्योंकि सभी ज़रूरी ईंधनों की सप्लाई सामान्य रूप से जारी है।
पेट्रोलियम एवं नेचुरल गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने पश्चिम एशिया घटनाक्रमों पर अंतर-मंत्रालयी प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि पूरे देश में एलपीजी वितरकों, रिटेल आउटलेट्स या उपभोक्ताओं को घबराने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि सभी जरूरी ईंधनों की सप्लाई सामान्य रूप से जारी है। उन्होंने सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे घबराकर ज्यादा खरीदारी न करें और ज़रूरत के हिसाब से ही ईंधन खरीदें। उन्होंने बताया कि पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की उपलब्धता और समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। नागरिकों को पीएनजी, इंडक्शन और इलेक्ट्रिक कुकटॉप जैसे खाना पकाने के वैकल्पिक ईंधनों को ज़्यादा से ज़्यादा अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव (खाड़ी) असीम आर महाजन ने संवाददाताओं को बताया कि खाड़ी और पश्चिम एशिया क्षेत्र में हो रहे घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रखी जा रही है, और भारतीय समुदाय की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दूतावास और वाणिज्य दूतावास चौबीसों घंटे हेल्पलाइन चला रहे हैं, स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहे हैं और पूरे क्षेत्र में भारतीय समुदाय के समूहों और कंपनियों के साथ संपर्क बनाए हुए हैं। महाजन ने कहा कि भारतीय नागरिकों को ईरान की यात्रा न करने की सलाह दी गई है, जबकि अब तक 2,551 भारतीयों को दूतावास की सहायता से ज़मीनी सीमा मार्गों के ज़रिए ईरान से बाहर निकाला जा चुका है।
इसके अलावा रसायन और उर्वरक मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस. शर्मा ने बताया कि खरीफ सीजन के लिए राज्यों भर में उर्वरकों की उपलब्धता 51 फीसदी से ज्यादा बनी हुई है। उन्होंने कहा कि पूरे देश में लगभग 200.98 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) उर्वरक उपलब्ध है। इसके साथ ही मुख्य उर्वरकों के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। शर्मा ने कहा कि संकट काल के बाद घरेलू उत्पादन काफी ज्यादा रहा है, जो कि 86.2 एलएमटी है और लगभग 22 एलएमटी आयात हमारे तटों तक पहुंच चुका है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर