हैदराबाद में अस्थमा रोगियों काे 8 जून को मुफ्त वितरित हाेगा मुरैल मछली प्रसादम

युगवार्ता    18-May-2026
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हैदराबाद में मछली प्रसादम का वितरण आठ जून को


हैदराबाद, 18 मई (हि.स.)। बथिनी परिवार की ओर से अस्थमा रोगियों और फेफड़ों की अन्य बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए वितरित

किया जाने वाली फ्री वार्षिक मछली प्रसादम इस बार 8 जून को मृगशिरा कार्ति के अवसर पर नामपल्ली के नुमाइश मैदान पर वितरित किया जाएगा। इसे लेकर राज्य के परिवहन मंत्री पोंनम प्रभाकर ने गुरुवार को यहां प्रशासनिक अधिकारियाें के साथ एक बैठक की।

दरअसल, बथिनी गौड़ परिवार पिछले 179 वर्षों से लगातार देशभर से लाखों अस्थमा रोगियों और फेफड़ों की अन्य बीमारियों से पीड़ित लोगों का फ्री में मछली प्रसादम वितरित करता है। इस बार भी मछली प्रसादम लेने के लिए नामपल्ली में बड़ी संख्या में मरीजाें के उमड़ने की उम्मीद है। हालांकि इसके लिए एक दिन ही निर्धारित है, लेकिन भारी भीड़ को देखते हुए बथिनी परिवार आमतौर पर इसे दूसरे दिन भी जारी रखता है।

हैदराबाद जिले के प्रभारी मंत्री पोंनम प्रभाकर ने गुरुवार को यहां कलेक्टरेट के सभागार में कलेक्टर प्रियंका आला, बथिनी परिवार के सदस्यों और अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ एक बैठक की। बैठक में मंत्री प्रभाकर ने कहा कि मछली प्रसादम का यह आयोजन, जो 179 वर्षों से विश्वास और आस्था का प्रतीक रहा है। यह हैदराबाद शहर की एक अनूठी विशेषता है। उन्होंने कहा कि इस बार तेलंगाना, देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से हजारों भक्तों और अस्थमा रोगियों के आने की उम्मीद है।

शहर के नामपल्ली स्थित नुमाइश मैदान पर मछली प्रसादम देने के लिए टोकन जारी करने के अलग से काउंटर खोले जाएंगे। भारी भीड़ को देखते हुए पन्द्रह सौ से ज्यादा पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी। दूरदराज से आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के लिए ठहरने, खाने पीने जैसे इंतजाम स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाएं करती हैं। मछली प्रसादम वितरण के लिए तेलंगाना मत्स्य विभाग दो दिनों तक मुरैल मछली की आपूर्ति करने की व्यवस्था कर रहा है। इसके लिए एक लाख से अधिक मुरैल मछलियां तैयार रखी गई हैं। मत्स्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इसके लिए अतिरिक्त 75 हजार और मछलियां तैयार रखी गई हैं।

उल्लेखनीय है कि बथिनी गौड़ परिवार 1845 से शहर में कोविड महामारी के दो वर्षों को छोड़कर लगातार शहर में मछली प्रसादम का वितरण बिना किसी रुकावट के कर रहा है। मान्यता है कि इस मछली के प्रसाद के सेवन से अस्थमा और फेफड़ों की अन्य बीमारियों से छुटकारा मिलता है।

प्रसादम का इतिहास और सेवन की विधि

मछली प्रसादम एक खास फॉर्मूले (विधि) से जुड़ा है, जिसे बथिनी परिवार तैयार करता है। उनका दावा है कि यह विधि उनके पूर्वजों को एक साधु ने दी थी। यह प्रसादम वितरण से एक दिन पहले पुराने हैदराबाद के दूधबाउली में बथिनी के पैतृक निवास पर तैयार किया जाता है और फिर आयोजन स्थल पर लाया जाता है। इस प्रक्रिया में एक छोटी जीवित मुरैल मछली (फिंगरलिंग) के मुंह में पीले रंग का हर्बल पेस्ट (औषधि) भरा जाता है और फिर उसे सीधे मरीज के मुंह में डाल दिया जाता है। मछली प्रसादम लेने वाले लोगों को इसकी प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए 45 दिन तक कड़े परहेज (डाइट) का पालन करने और मांसाहारी भोजन से दूर रहने की सलाह दी जाती है। खास बात यह है कि अब इस दवा के लिए किसी भी तरह का शुल्क नहीं लिया जाता।

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हिन्दुस्थान समाचार / Dev Kumar Pukhraj

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