कार्यवाहक प्रधान न्यायाधीश के आदेश के बाद नेपाल सुप्रीम कोर्ट में मची अफरा-तफरी, गायब हुए प्रशासनिक कर्मचारी

18 May 2026 16:30:53
नेपाल का सर्वोच्च अदालत


काठमांडू, 18 मई (हि.स.)। नेपाल सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को उस समय अफरातफरी मच गई, जब कार्यवाहक प्रधान न्यायाधीश ने प्रधान न्यायाधीश की नियुक्ति के खिलाफ दायर याचिकाओं को पंजीकृत करने का आदेश दिया। इसके बाद अदालत के मुख्य रजिस्ट्रार, रजिस्ट्रार और अन्य प्रशासनिक कर्मचारी अदालत परिसर से गायब हो गए।

कार्यवाहक प्रधान न्यायाधीश सपना प्रधान मल्ल की तरफ से आदेश जारी होने के बाद सर्वोच्च अदालत प्रशासन के कर्मचारी अपने कार्यालय छोड़कर चले गए, जिससे अधिकांश प्रशासनिक शाखाएं खाली हो गईं। वकील अब अदालत कर्मचारियों के दुर्व्यवहार के विरोध में प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं।

कार्यवाहक प्रधान न्यायाधीश मल्ल ने अदालत प्रशासन को सोमवार दोपहर 1 बजे तक लंबित सभी याचिकाओं का पंजीकरण करने और उन्हें मंगलवार की सुनवाई सूची में शामिल करने का निर्देश दिया था। इन याचिकाओं में डॉ. मनोज शर्मा को प्रधान न्यायाधीश पद के लिए सिफारिश किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई है। मल्ल के सचिवालय ने सर्वोच्च अदालत प्रशासन को निर्धारित समय सीमा के भीतर पंजीकरण प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया था, लेकिन समय सीमा बीत जाने के बाद भी याचिका दर्ज नहीं की गई।

इससे पहले सर्वोच्च अदालत प्रशासन ने प्रक्रिया संबंधी आधार पर इन रिट याचिकाओं को पंजीकृत करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने उस निर्णय को चुनौती देते हुए याचिकाओं के पंजीकरण की मांग की। कार्यवाहक प्रधान न्यायाधीश के सचिवालय से निर्देश मिलने के बाद सोमवार को दोपहर 1 बजे के बाद याचिकाएं पंजीकृत कर ली गईं। अब इस मामले में सुनवाई होगी, जिसमें यह तय किया जाएगा कि प्रशासनिक अस्वीकृति को बरकरार रखा जाए या याचिकाओं को स्वीकार कर आगे की न्यायिक प्रक्रिया चलाई जाए।

संवैधानिक परिषद ने 8 मई को प्रधान न्यायाधीश के लिए जस्टिस मनोज शर्मा के नाम की सिफारिश की थी। इसे वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश त्रिपाठी और अधिवक्ता प्रेम सुवाल ने सर्वोच्च अदालत में चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि यह निर्णय वरिष्ठता और स्थापित परंपराओं के खिलाफ है। बार-बार प्रयासों के बावजूद याचिकाएं पंजीकृत नहीं हो पा रही थीं, लेकिन कार्यवाहक प्रधान न्यायाधीश के निर्देश के बाद अब इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता खुल गया है। संविधान के अनुच्छेद 128(2) और 136 का हवाला देते हुए त्रिपाठी ने कार्यवाहक प्रधानन्यायाधीश से हस्तक्षेप की मांग की, जिसके बाद सचिवालय ने याचिका के पंजीकरण का आदेश जारी किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास

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