संस्थागत भ्रष्टाचार और महिला उत्पीड़न के लिए दो आयोग गठित, सेवानिवृत्त जज करेंगे नेतृत्व

18 May 2026 17:10:53
शुभेंदु अधिकारी


कोलकाता, 18 मई (हि.स.)। पश्चिम बंगाल में सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने संस्थागत भ्रष्टाचार और महिला उत्पीड़न के मामलों की जांच के लिए दो अलग-अलग जांच आयोग गठित करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को नवान्न में आयोजित मंत्रिमंडल की दूसरी बैठक के बाद इसकी जानकारी दी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि दोनों आयोग एक जून से अपना काम शुरू करेंगे। संस्थागत भ्रष्टाचार की जांच के लिए गठित आयोग की अध्यक्षता न्यायमूर्ति विश्वजीत बसु करेंगे। इस आयोग में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के. जयरामन को सदस्य सचिव बनाया गया है, जो वर्तमान में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (उत्तर बंगाल) के पद पर कार्यरत हैं।

वहीं महिलाओं और बालिकाओं पर अत्याचार से जुड़े मामलों की जांच के लिए बनाए गए दूसरे आयोग की अध्यक्षता न्यायमूर्ति समाप्ति चट्टोपाध्याय करेंगी। इस आयोग में आईपीएस अधिकारी दमयंती सेन सदस्य सचिव की जिम्मेदारी संभालेंगी। वह फिलहाल अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (आर्म्ड फोर्स) के पद पर तैनात हैं।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा ने भ्रष्टाचार और महिला सुरक्षा के मुद्दों पर सख्त कार्रवाई का वादा किया था। सरकार बनने के 10 दिनों के भीतर इन आयोगों का गठन उसी वादे को पूरा करने की दिशा में अहम कदम है।

उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न सामाजिक योजनाओं, निर्माण परियोजनाओं और सेवा कार्यों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है। कटमनी, रिश्वतखोरी, सरकारी धन के दुरुपयोग और आम लोगों के साथ धोखाधड़ी जैसे मामलों में सरकारी अधिकारियों, पंचायत प्रतिनिधियों, पार्षदों और बिचौलियों की संलिप्तता रही है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि भ्रष्टाचार जांच आयोग को मुख्य सचिव और गृह सचिव की ओर से प्रशासनिक, तकनीकी और आधारभूत सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। आयोग को आवश्यक दस्तावेज और मानव संसाधन भी दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि आयोग काम शुरू होने के 30 दिनों के भीतर प्रारंभिक सिफारिशें देना शुरू कर सकता है, जिसके आधार पर पुलिस प्राथमिकी दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत कार्रवाई करेगी।

महिला और बालिका सुरक्षा आयोग के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा कि आयोग के पूरी तरह सक्रिय होने के बाद एक समर्पित पोर्टल शुरू किया जाएगा, जहां पीड़ित शिकायत दर्ज करा सकेंगे। पुराने लंबित मामलों और एफआईआर की भी समीक्षा की जाएगी।

उन्होंने यह भी बताया कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, अनुसूचित जाति आयोग, अनुसूचित जनजाति आयोग, ओबीसी आयोग, अल्पसंख्यक आयोग और महिला एवं बाल अधिकार आयोगों की लंबित सिफारिशों की भी प्रारंभिक समीक्षा की जाएगी। -------------------

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर

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