
कोलकाता, 18 मई (हि.स.)। पश्चिम बंगाल में जल जीवन मिशन, गंगा प्रदूषण नियंत्रण और जल संरक्षण परियोजनाओं की प्रगति को लेकर सोमवार को केंद्र और राज्य सरकार के बीच उच्चस्तरीय वर्चुअल बैठक हुई। बैठक में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल और केंद्रीय राज्य मंत्री वी. सोमनाथा समेत कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
बैठक में राज्य में चल रही पेयजल परियोजनाओं, वर्षा जल संरक्षण, गंगा प्रदूषण रोकथाम और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से जुड़े कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री ने बताया कि वर्ष 2026-27 के लिए पश्चिम बंगाल को संभावित रूप से 2775 करोड़ रुपये आवंटित किए जा सकते हैं। हालांकि, यह परियोजनाओं की प्रगति और निर्धारित शर्तों के पालन पर निर्भर करेगा।
बैठक में विशेष रूप से दार्जिलिंग, कलिम्पोंग और पुरुलिया जिलों में पेयजल योजनाओं के काम में तेजी लाने पर जोर दिया गया। केंद्र सरकार ने परियोजना रिपोर्टों में पाई गई विसंगतियों, डुप्लिकेट योजनाओं और लंबित मामलों को जल्द सुलझाने की जरूरत बताई।
गंगा प्रदूषण नियंत्रण के तहत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट परियोजनाओं की धीमी प्रगति पर भी चिंता जताई गई। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कई परियोजनाएं भूमि उपलब्ध नहीं होने के कारण अटकी हुई हैं। इस पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अधिकारियों को जरूरी कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए।
बैठक में ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान को व्यापक जन आंदोलन बनाने पर भी चर्चा हुई। आगामी मानसून से पहले वर्षा जल संरक्षण से जुड़े कार्यों को तेजी से पूरा करने के लिए जिला प्रशासन को सक्रिय भूमिका निभाने को कहा गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ जल प्रबंधन के लिए केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करेगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि हर परिवार तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है।
बैठक के अंत में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने पश्चिम बंगाल सरकार को पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।---------------------
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर