केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने एनईआरआईवाल्म बैठक में वार्षिक प्रतिवेदन और लेखा परीक्षण को दी मंजूरी, नई परियोजनाओं पर चर्चा

19 May 2026 18:47:53
गुवाहाटी में एनईआरआईवाल्म की शासी निकाय बैठक की अध्यक्षता करते केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल।


नई दिल्ली, 19 मई (हि.स.)। पूर्वोत्तर क्षेत्रीय जल एवं भूमि प्रबंधन संस्थान (एनईआरआईवाल्म) की शासी निकाय की छठी बैठक में केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने संस्थान की वार्षिक प्रतिवेदन और वित्त वर्ष 2024‑25 के लेखा परीक्षण को मंजूरी दी और सिंचाई क्षेत्र प्रयोगशाला और प्रदर्शन फार्म की स्थापना का प्रस्ताव रखा।

असम के गुवाहटी में हुई इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल ने की। उन्होंने बैठक से पहले संस्थान के नवनिर्मित अंतरराष्ट्रीय छात्रावास‑सह-अतिथि गृह का वर्चुअल उद्घाटन किया और कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र की चुनौतियों से निपटने के लिए वैज्ञानिक जल प्रबंधन, क्षमता निर्माण और राज्यों की अधिक भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने आश्वस्त किया कि मंत्रालय एनईआरआईवाल्म को जल और भूमि प्रबंधन के क्षेत्र में उत्कृष्टता केंद्र बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

बैठक में बताया गया कि संस्थान ने प्रशिक्षण लक्ष्य से अधिक उपलब्धि हासिल की है। वर्ष के दौरान 71 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए जिनसे 2,800 से अधिक प्रतिभागी लाभान्वित हुए। साथ ही एमटेक और पीएचडी पाठ्यक्रमों को भी जारी रखा गया। बैठक में बाहरी वित्तपोषित परियोजनाओं की भूमिका पर भी विचार किया गया, जिनमें असम में टिकाऊ सिंचाई विकास, ब्रह्मपुत्र जल मोड़ के आर्थिक प्रभाव, जल संचयन योजना और पूर्वोत्तर भारत की पारंपरिक जल प्रबंधन पद्धतियों पर अध्ययन शामिल हैं।

शासी निकाय ने संस्थान के संविधान में संशोधन पर भी चर्चा की। इसमें उपलब्धि समीक्षा समिति की बैठक हर तीन वर्ष में कराने का प्रस्ताव और तकनीकी सलाहकार समिति का नाम बदलकर शैक्षणिक सलाहकार समिति करने का सुझाव शामिल था। बैठक में एम.टेक. और पीएच.डी. छात्रों के लिए छात्रवृत्ति सहायता, संकाय विकास, अनुसंधान क्षमता सुदृढ़ीकरण तथा जल संसाधन प्रबंधन में जलवायु और जीआईएस आधारित अनुप्रयोगों पर अध्ययन को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।

बैठक में ब्रह्मपुत्र घाटी में कटाव प्रभावित परिवारों की आजीविका चुनौतियों पर किए गए अध्ययन की समीक्षा की गई और विस्थापित समुदायों के लिए टिकाऊ पुनर्वास और आजीविका हस्तक्षेपों पर विचार किया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर

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