2030 तक 350 अरब डॉलर का होगा भारतीय कपड़ा बाजार : गिरिराज सिंह

19 May 2026 22:30:53
वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह सहित अन्य लोग मौजूद।


नई दिल्ली, 19 मई (हि.स.)। केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने मंगलवार को कहा कि सरकार ने वर्ष 2030-31 तक घरेलू कपड़ा बाजार के आकार को 350 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इस योजना में अकेले निर्यात का हिस्सा 100 अरब डॉलर का होगा।

गिरिराज सिंह ने यह बात नई दिल्ली स्थित अशोका होटल में 'न्यू एज फाइबर्स' पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन के अवसर पर कही। इसका विषय नए युग के रेशे: नवाचार, अनुसंधान और भविष्य की राह था। इस दौरान, 'आत्मनिर्भर भारत' और सतत विकास पर जोर दिया गया। इसका मुख्य उद्देश्य अनानास, बांस, भांग और केला जैसे उभरते टिकाऊ रेशों के माध्यम से वस्त्र क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करना है।

उन्होंने कहा, वैश्विक स्तर पर पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ विकल्पों को बढ़ावा देने के लिए 'न्यू एज फाइबर' और 'सस्टेनेबल फाइबर' भारतीय वस्त्र उद्योग का भविष्य है। वैश्विक स्तर पर बढ़ते 'ग्लोबल वार्मिंग' के खतरों के बीच भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की इस लड़ाई में दुनिया को नई दिशा दे रहा है।

मंत्री ने कहा कि कॉटन सीड वेरिफिकेशन और सिंथेटिक इनपुट पर बाहरी नियंत्रण जैसी प्रशासनिक व व्यावहारिक चुनौतियों के बावजूद भारत का वस्त्र विभाग देश के बुनकरों और शिल्पकारों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि जीवन और उद्योग में जब तक चुनौतियाँ नहीं आतीं, तब तक नवाचार संभव नहीं है। ' मिल्क वीड' जैसे न्यू एज फाइबर की अंतरराष्ट्रीय बाजार (विशेषकर जापान) में भारी मांग है। इसके अलावा, कोयंबटूर में ताइवान के संयुक्त सहयोग से सर्कुलर निटिंग और स्विमिंग मशीन यूनिट की स्थापना भारतीय टेक्सटाइल के स्वदेशीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है।

गिरिराज सिंह ने बताया कि जूट उद्योग को केवल सरकारी खरीद और बोरियों तक सीमित न रखकर फैशन और लाइफस्टाइल ब्लेंडिंग (जैसे जूट जैकेट) से जोड़ा जा रहा है। पश्चिम बंगाल और अन्य जूट उत्पादक राज्यों के लिए मनरेगा के सहयोग से एक विशेष पायलट प्रोजेक्ट केंद्र सरकार को प्रस्तावित करने की तैयारी है।

पूर्वोत्तर राज्यों को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चुनकर बनाना फाइबर के लिए कृषक उत्पादक संगठन और एग्रीगेटर मॉडल विकसित किया जाएगा। इसके बाद इस मॉडल को तमिलनाडु और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में विस्तारित कर ग्रामीण रोजगार सृजित किया जाएगा।

वस्त्र राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने जमीनी स्तर पर उद्यमशीलता और कौशल विकास की आवश्यकता पर बल दिया।

वस्त्र सचिव नीलम शमी राव ने इन व्यावहारिक चर्चाओं को ठोस नीतिगत उपायों में बदलने के महत्व को रेखांकित किया।

वस्त्र मंत्रालय की संयुक्त सचिव (फाइबर) पद्मिनी सिंगला ने वैश्विक स्तर पर पर्यावरण-अनुकूल वस्त्रों की बढ़ती मांग पर प्रकाश डाला।

राष्ट्रीय जूट बोर्ड के सचिव शशि भूषण सिंह ने कहा कि भारत की विविध कृषि-जलवायु परिस्थितियां इन रेशों के व्यापक उत्पादन के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करती हैं, जिससे किसानों की आय दोगुनी करने में मदद मिलेगी।

इस राष्ट्रीय सेमिनार में मुख्य रूप से अनानास, अलसी, मिल्कवीड, बांस, भांग, बिछुआ, केला, रेमी और कपास जैसे पर्यावरण-अनुकूल और जैव अपघटनीय रेशों पर ध्यान केंद्रित किया गया।

कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने न्यू एज फाइबर्स एक्सपो का उद्घाटन किया गया और साथ ही 'न्यू एज फाइबर्स' पुस्तिका और तीन विशेष टास्क फोर्स द्वारा तैयार की गई विस्तृत रिपोर्ट जारी की।

संगोष्ठी के विभिन्न तकनीकी सत्रों में रेशा निष्कर्षण तकनीकों, आपूर्ति श्रृंखला की कमियों को दूर करने, स्टार्टअप्स के लिए व्यावसायिक मॉडल विकसित करने और क्लस्टर-आधारित प्रसंस्करण मॉडल पर चर्चा की गई।

वस्त्र मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय जूट बोर्ड के माध्यम से आयोजित इस संगोष्ठी में नीति निर्माताओं, उद्योगपतियों, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स सहित विभिन्न हितधारकों ने देश के वस्त्र क्षेत्र में उभरते टिकाऊ रेशों की परिवर्तनकारी क्षमता पर विस्तृत विचार-विमर्श किया।

अंतिम सत्र में '2030 रोडमैप' के तहत भारतीय टिकाऊ रेशों की वैश्विक ब्रांडिंग करने और भारत को इस क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए एक रणनीतिक योजना तैयार की गई। वस्त्र मंत्रालय को उम्मीद है कि इस संगोष्ठी के निष्कर्षों के आधार पर जल्द ही एक व्यापक 'न्यू एज फाइबर नीति' का ढांचा तैयार किया जाएगा।

इस कार्यक्रम में वस्त्र आयुक्त वृंदा मनोहर देसाई, जूट व हस्तशिल्प आयुक्त अमृत राज और सीआरआईएएफ के निदेशक डॉ. गौरांगा कार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी

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