हिंद महासागर पोत 'सुनयना' कोच्चि लौटा, वाटर कैनन सैल्यूट के साथ हुआ स्वागत

20 May 2026 19:35:53
कोच्चि बंदरगाह लौटने पर वाटर कैनन सैल्यूट के साथ हुआ हिंद महासागर पोत 'सुनयना' का स्वागत


- नौसेना ने आईओआर में क्षेत्रीय समुद्री सहयोग और सामूहिक सुरक्षा को मजबूत किया

नई दिल्ली, 20 मई (हि.स.)। भारतीय नौसेना का जहाज 'सुनयना' हिंद महासागर पोत (आईओएस) सागर 7 सप्ताह की यात्रा करने के बाद बुधवार को कोच्चि लौट आया। इस दौरान इस जहाज ने इंडो-पैसिफिक और हिंद महासागर क्षेत्र के सबसे स्ट्रेटेजिक रूप से अहम पानी में हजारों नॉटिकल मील की दूरी तय की। इस यात्रा में साझेदार रहे 16 देशों के 38 क्रू मेंबर्स के साथ यह संयुक्त मिशन पूरा करके भारतीय नौसेना ने हिंद महासागर क्षेत्र में क्षेत्रीय समुद्री सहयोग और सामूहिक सुरक्षा को मजबूत किया।

भारतीय नौसेना के साथ बांग्लादेश, इंडोनेशिया, केन्या, मलेशिया, मॉरीशस, मालदीव, मोजाम्बिक, म्यांमार, सेशेल्स, सिंगापुर, साउथ अफ्रीका, श्रीलंका, तंजानिया, थाईलैंड, तिमोर लेस्ते और संयुक्त अरब अमीरात ने मिलकर यह तैनाती की थी। कोच्चि बंदरगाह लौटने पर आईएनएस सुनयना का वाटर कैनन सैल्यूट के साथ औपचारिक स्वागत किया गया। नौसेना की तेज इंटरसेप्टर नौकाओं से एस्कॉर्ट किए गए इस जहाज का दक्षिणी नौसेना कमान के अधिकारियों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। जहाज के पहुंचने पर दक्षिणी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल समीर सक्सेना ने तैनाती के दौरान 16 देशों के 38 क्रू मेंबर्स के पेशेवर व्यवहार और बेहतरीन टीमवर्क को सराहा।

इस मौके पर वाइस एडमिरल समीर सक्सेना ने कहा कि 2 अप्रैल को मुंबई से रवाना होते समय आईओएस सागर अपने साथ भारत का दोस्ती, विश्वास, सबको साथ लेकर चलने और साझा समुद्री जिम्मेदारी का संदेश लेकर गया था। भारतीय नौसेना ने लगातार ऑपरेशनल मौजूदगी, मानवीय मदद, क्षमता निर्माण और मित्र देशों के साथ साझेदारी के जरिए इस विजन को एक्शन में बदला है। सेरेमनी के दौरान कर्मचारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने जोर दिया कि सुरक्षित, स्थिर और खुशहाल समुद्री माहौल पक्का करने के लिए क्षेत्रीय समुद्री सेनाओं के बीच लगातार मिलकर काम करने और ऑपरेशनल तालमेल जरूरी है।

उन्होंने बताया कि इस तैनाती से संयुक्त प्रशिक्षण, पेशेवर लेनदेन और मिलकर की जाने वाली ऑपरेशनल गतिविधियों के जरिए ऑपरेशनल तालमेल और आपसी समझ में काफी बढ़ोतरी हुई है। इस तरह के जुड़ाव समुद्री डकैती, गैर-कानूनी मछली पकड़ने, हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी और समुद्र में दूसरी गैर-कानूनी गतिविधियों जैसे गैर-पारंपरिक समुद्री खतरों का असरदार तरीके से मुकाबला करने के लिए क्षेत्रीय नौसेना की मिलकर काम करने की क्षमता को मजबूत करते हैं। यात्रा के दौरान जहाज ने माले, फुकेट, जकार्ता, सिंगापुर, यांगून, चटगांव और कोलंबो के पोर्ट कॉल किए और समुद्री अभ्यासों में शामिल हुआ। -------------

हिन्दुस्थान समाचार / सुनीत निगम

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