राष्ट्रपति मुर्मु ने आईएएस अधिकारियों से कहा, भावुक हुए बिना संवेदनशील बनें

20 May 2026 15:12:53
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु बुधवार को 2024 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारियों के एक समूह को संबोधित करते हुए


नई दिल्ली, 20 मई (हि.स.)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बुधवार को कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों को करुणा और तर्कसंगतता के बीच संतुलन बनाना चाहिए तथा संवेदनशील होना चाहिए लेकिन भावुक नहीं।

राष्ट्रपति भवन में विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों में सहायक सचिव के रूप में कार्यरत 2024 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारियों के एक समूह ने राष्ट्रपति से मुलाकात की। इस दौरान राष्ट्रपति ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि अखिल भारतीय सेवाओं, विशेषकर आईएएस ने देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और अब देश के विकास के नए चरण में प्रवेश करने के साथ अधिकारियों से अपेक्षाएं भी बढ़ गई हैं।

उन्होंने कहा कि युवा अधिकारियों को विविध क्षेत्रों में काम करने का अवसर मिलेगा और कई बार उन्हें विशेषज्ञों की टीमों का नेतृत्व भी करना पड़ेगा। ऐसे में उनके सीखने की गति और दायरा दोनों व्यापक होने चाहिए तथा विभिन्न परिस्थितियों और क्षेत्रों के अनुरूप स्वयं को ढालने की क्षमता असाधारण होनी चाहिए।

राष्ट्रपति ने कहा कि अधिकारियों की निष्पक्षता उनकी न्यायप्रियता का संकेत होगी, जबकि उनकी संवेदनशीलता समावेशिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाएगी। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता और निरंतर प्रदर्शन से उनकी विश्वसनीयता बनेगी तथा व्यक्तिगत और पेशेवर आचरण से परिभाषित उनकी ईमानदारी उन्हें जनहित में निर्णायक कदम उठाने का नैतिक साहस देगी।

राष्ट्रपति ने कहा कि नैतिकता और सुशासन एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। अधिकारियों को ईमानदार और नैतिक होने के साथ-साथ परिणाम भी देने होंगे। उन्होंने कहा कि निर्णय लेने से बचना नैतिकता नहीं है बल्कि जनहित और स्थापित व्यवस्था के अनुरूप सही निर्णय लेना ही वास्तविक नैतिकता है।

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार न्याय मिलने में देरी को न्याय से वंचित करना माना जाता है, उसी प्रकार प्रशासनिक निर्णयों में देरी भी लोगों को उनके वैध अधिकारों से वंचित करने के समान है।

राष्ट्रपति ने कहा कि लोकतंत्र का उद्देश्य लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना है और ये आकांक्षाएं उनके निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम से सामने आती हैं। इसलिए अधिकारियों का कर्तव्य है कि वे जनहित में जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए मुद्दों को प्राथमिकता दें।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने और समाज को प्रगति के शिखर तक पहुंचाने के लिए अधिकारियों को कई बार परिस्थितियों के विपरीत जाकर भी कार्य करना होगा। राष्ट्रपति ने अधिकारियों से कहा कि वे समाज के वंचित वर्गों सहित देश के लोगों को अपने विचारों और कार्यों के केंद्र में रखें।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार

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