नई दिल्ली, 20 मई (हि.स.)। भारतीय रेलवे ने ऑटोमोबाइल परिवहन में जबरदस्त उछाल के कारण माल ढुलाई से होने वाली आय में इस वर्ष अप्रैल में करीब एक तिहाई वृद्धि दर्ज करके रिकॉर्ड कायम किया है।
रेल मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल 2026 में से रेलवे की आय पिछले वर्ष की तुलना में 33 प्रतिशत बढ़कर 141.64 करोड़ रुपये हो गई। वाहनों की ढुलाई में 29 प्रतिशत वृद्धि इस उछाल का मुख्य कारण रही।
रेल भवन में आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस क्षेत्र की प्रगति की समीक्षा की। अधिकारियों ने बताया कि पीएम गतिशक्ति ढांचे के तहत सड़क के बजाय रेल मार्ग से माल ढुलाई बढ़ाने की नीति ने इस वृद्धि को संभव बनाया है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2025 में उपयोग किए गए 15,643 ऑटोमोबाइल वैगनों की संख्या अप्रैल 2026 में बढ़कर 20,197 वैगन हो गई। इस बढ़ोतरी से रेलवे का राजस्व 106.81 करोड़ रुपये से बढ़कर 141.64 करोड़ रुपये पर पहुंचा। भारतीय रेलवे और मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2014-15 से अब तक रेल के माध्यम से 30 लाख से अधिक वाहनों का परिवहन किया है।
उल्लेखनीय है कि मारुति सुजुकी ने रेल के जरिए 20 लाख से 30 लाख वाहनों तक पहुँचने में केवल 21 महीने का समय लिया, जो कंपनी की रेल लॉजिस्टिक्स यात्रा में सबसे तेज़ 10 लाख का मील का पत्थर है। इसके विपरीत, पहले 20 लाख वाहनों के परिवहन में पूरे एक दशक का समय लगा था।
एक वरिष्ठ रेल अधिकारी ने कहा कि रेलवे के माध्यम से ऑटोमोबाइल परिवहन का विस्तार “कुशल, पर्यावरण-अनुकूल और भविष्य के लिए तैयार माल ढुलाई इकोसिस्टम” बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि मारुति सुजुकी के कुल वाहनों के परिवहन में रेल की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2014-15 के मात्र 5 प्रतिशत से पांच गुना बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 26.5 प्रतिशत हो गई है।
इस वृद्धि के पीछे पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत विकसित इन-प्लांट रेलवे साइडिंग की अहम भूमिका रही है।
हंसलपुर साइडिंग (गुजरात) की सुविधा मार्च 2023 में शुरू हुई थी। इस सुविधा को फरवरी 2026 में अंतरराष्ट्रीय कार्बन क्रेडिट संस्था ‘वेरा’ के तहत दुनिया की पहली *मोडल शिफ्ट ट्रांसपोर्टेशन प्रोजेक्ट* के रूप में पंजीकृत किया गया था। जबकि मानेसर साइडिंग (हरियाणा) जून 2025 में शुरू हुई थी। यह सुविधा भारत की सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल इन-प्लांट रेलवे साइडिंग बन गई है। मार्च 2026 तक इसने महज 10 महीनों में ही एक लाख वाहनों का परिवहन कर लिया।
हंसलपुर और मानेसर साइडिंग की संयुक्त वार्षिक क्षमता लगभग 7.5 लाख वाहनों की है। ‘हब-एंड-स्पोक’ मॉडल पर आधारित यह नेटवर्क देशभर के 22 विशेष लॉजिस्टिक्स हब के माध्यम से 600 से अधिक शहरों को जोड़ता है। साथ ही मुंद्रा और पीपावाव जैसे प्रमुख बंदरगाहों से जुड़कर भारत के ऑटोमोबाइल निर्यात को भी मजबूती प्रदान कर रहा है।
रेल मंत्रालय ने कहा कि रेल आधारित लॉजिस्टिक्स की ओर यह झुकाव सड़कों पर ट्रैफिक जाम कम करने, ईंधन की खपत घटाने, कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने और भारतीय उद्योगों के लिए आपूर्ति श्रृंखला की विश्वसनीयता बढ़ाने में राष्ट्रीय हरित लक्ष्यों को मजबूत कर रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन बुधौलिया