
सिलहट, 20 मई (हि.स.)। बांग्लादेश के खिलाफ सिलहट टेस्ट में 78 रन की हार और लगातार दूसरी टेस्ट सीरीज गंवाने के बाद शान मसूद ने अपनी कप्तानी के भविष्य पर सीधे जवाब देने से बचते हुए कहा कि उनका पूरा ध्यान पाकिस्तान टेस्ट क्रिकेट को बेहतर बनाने पर है।
इस हार के साथ पाकिस्तान ने कई शर्मनाक रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए। बांग्लादेश के खिलाफ लगातार चार टेस्ट हारने वाली पाकिस्तान जिम्बाब्वे के बाद दूसरी टीम बन गई है। इसके अलावा विदेशी धरती पर पाकिस्तान की यह लगातार सातवीं टेस्ट हार रही, जो टीम के सबसे खराब रिकॉर्ड की बराबरी है।
शान मसूद का कप्तानी रिकॉर्ड भी लगातार सवालों के घेरे में है। उनकी कप्तानी में पाकिस्तान ने 16 टेस्ट में 12 हार झेली हैं। पाकिस्तान के किसी कप्तान के तौर पर इससे ज्यादा हार केवल मिस्बाह-उल-हक को मिली थीं, हालांकि उन्होंने 56 टेस्ट में कप्तानी की थी।
मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में मसूद ने कहा, “मेरी नीयत हमेशा साफ रही है। मैंने यह जिम्मेदारी पाकिस्तान टेस्ट क्रिकेट को बेहतर बनाने के लिए ली थी। आगे क्या फैसला होगा, यह बोर्ड के हाथ में है। लेकिन मेरा प्रयास हमेशा यही रहेगा कि टीम कैसे आगे बढ़े और बेहतर बने।” उन्होंने आगे कहा, “जरूरी नहीं कि मैं कप्तानी की कुर्सी पर बैठकर ही योगदान दूं। खिलाड़ी के तौर पर या किसी भी भूमिका में मैं पाकिस्तान क्रिकेट के लिए पूरी ईमानदारी से काम करता रहूंगा। इस समय केवल बदलाव की बात करने के बजाय हमें यह सोचना चाहिए कि पाकिस्तान टेस्ट क्रिकेट को कैसे सुधारा जाए।”
सिलहट टेस्ट में पाकिस्तान ने पहले दिन बांग्लादेश को 116 रन पर छह विकेट तक पहुंचा दिया था, लेकिन लिटन दास के शतक ने मैच का रुख बदल दिया। मसूद ने माना कि टीम ने अहम मौकों पर गलतियां कीं। उन्होंने कहा, “अगर हम इस सीरीज की बात करें तो दोनों टेस्ट मैचों में हमारे पास जीत के मौके थे। लेकिन बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग – हर विभाग में हमने ऐसी गलतियां कीं जिनकी कीमत चुकानी पड़ी। टेस्ट क्रिकेट में पांच दिनों के दौरान छोटी गलतियां भी बहुत भारी पड़ती हैं।”
मसूद ने टीम में बड़े बदलाव की मांगों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सुधार भावनाओं में बहकर नहीं बल्कि संरचनात्मक बदलावों से आएगा।उन्होंने कहा, “हमें यह देखना होगा कि टीम को किस तरह का क्रिकेट खेलना है और कमजोरियों को कैसे दूर करना है। खिलाड़ी 18 साल का हो या 40 साल का, इससे फर्क नहीं पड़ता। मायने यह रखता है कि वह टीम की जरूरत के हिसाब से भूमिका निभा सकता है या नहीं।” उन्होंने आगे कहा, “जब आप हारते हैं तो सबकुछ ठीक है ऐसा नहीं कह सकते। लेकिन फैसले भावनाओं में नहीं लेने चाहिए। हमें जड़ों तक जाकर समस्याओं को समझना होगा। पाकिस्तान टेस्ट क्रिकेट में सुधार के लिए संरचनात्मक बदलाव जरूरी हैं।”
इस सीरीज में शान मसूद ने एक अर्धशतक जरूर लगाया, लेकिन उनका औसत 26 से भी कम रहा। वहीं मोहम्मद रिजवान ने अंतिम टेस्ट में 94 रन की संघर्षपूर्ण पारी खेली। बांग्लादेश की ओर से तैजुल इस्लाम ने दूसरी पारी में छह विकेट लेकर जीत में अहम भूमिका निभाई।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील दुबे