विदेश यात्रा के दौरान वैश्विक नेताओं को प्रधानमंत्री ने दिए कला, विरासत और व्यंजनों से भरे उपहार

21 May 2026 18:03:53
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा वैश्विक नेताओं को भेंट किए गए सांस्कृतिक उपहारों की एक झलक।


सांस्कृतिक उपहारों की एक झलक।


नई दिल्ली, 21 मई (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी पांच देशों- यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की यात्रा पूरी करके स्वदेश लौट आए हैं। उन्होंने 15-20 मई तक की अपनी हालिया विदेश यात्राओं के दौरान वैश्विक नेताओं को भारत की समृद्ध कलात्मक विरासत, शिल्प कौशल और पारंपरिक व्यंजनों को दर्शाने वाले अनूठे उपहार भेंट किए। ये उपहार न केवल भारत की सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करते हैं बल्कि संबंधित देशों के साथ गहरे द्विपक्षीय एवं ऐतिहासिक संबंधों को भी रेखांकित करते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मैटरेला को आगरा के कारीगरों द्वारा निर्मित संगमरमर की जड़ाई (पिएत्रा दुरा) का बक्सा भेंट किया। इसमें भारत रत्न पंडित भीमसेन जोशी और एमएस सुब्बुलक्ष्मी के गायन से जुड़ी सीडी है जबकि प्रधानमंत्री जार्जिया मेलोनी को असम का मूगा रेशमी शॉल (अपनी प्राकृतिक सुनहरी चमक के लिए प्रसिद्ध भारत का स्वर्ण रेशम) और शिरुई लिली सिल्क स्टोल (मणिपुर के दुर्लभ शिरुई लिली फूल से प्रेरित, जो इतालवी पुनर्जागरण कला में भी पवित्रता का प्रतीक है) भेंट की।

नीदरलैंड के राजा विलेम अलेक्जेंडर को जयपुर की ब्लू पॉटरी कलाकृतियां (जीआई टैग) भेंट की, जो क्वार्ट्ज पाउडर और कांच के मिश्रण से निर्मित पारंपरिक सिरेमिक कला, जो नीदरलैंड की 'डेल्फ़्ट ब्लू पॉटरी' के साथ सांस्कृतिक जुड़ाव दर्शाती है। नीदरलैंड की रानी मैक्सिमा को मीनाकारी और कुंदन की बालियां उपहार में दीं। ये बालियां राजस्थान की शाही परंपरा से जुड़े जीवंत रंगों और सोने की पन्नी में जड़े रत्नों का आभूषण है। डच शाही परिवार के सम्मान में इसमें नारंगी और नीले रंगों का विशेष चयन किया गया। इसके अलावा प्रधानमंत्री रोब जेटेन को मछली के रूपांकन वाली मधुबनी पेंटिंग (जीआई टैग) भेंट की, जो मिथिला क्षेत्र की लोककला पर आधारित है। इसमें मछली का पारंपरिक रूपांकन शामिल है।

नॉर्वे की रानी को सम्मान में ओडिशा के ताड़ के पत्तों का पट्टाचित्र (ताला पट्टाचित्र) भेंट किया। ताड़ के पत्तों पर की गई बारीक नक्काशी, जो नॉर्दिक लोक और हस्तलिखित कला परंपराओं से मेल खाती है। नॉर्वे के युवराज को सूर्य और चंद्रमा की कलमकारी पेंटिंग भेंट की, जो आंध्र प्रदेश की प्राचीन वस्त्र कला है। इसमें सूर्य और चंद्रमा का पूरक संतुलन दर्शाया गया है।

नॉर्वे के प्रधानमंत्री को सूखे ऑर्किड की पेंटिंग और पेपरवेट भेंट किया गया, जो देश के पहले जैविक राज्य सिक्किम की घाटियों से एकत्रित असली ऑर्किड और फर्न से निर्मित कलाकृति है। नॉर्वे के राजा को चांदी का जटिल नौका मॉडल (तारकासी) दिया गया, जो कटक की 500 साल पुरानी चांदी की जालीदार कला है यह ओडिशा के ऐतिहासिक समुद्री व्यापार और राजा हेराल्ड पंचम के नौकायन (ओलंपिक) इतिहास के प्रति सम्मान को दर्शाता है।

स्वीडन के प्रधानमंत्री को शांतिनिकेतन मैसेंजर बैग (पश्चिम बंगाल की पारंपरिक लोक कला और आधुनिक डिजाइन का मिश्रण), लद्दाख का शुद्ध ऊनी (पश्मीना) शॉल (चांगथांग के ऊंचे पठार की बकरियों की महीन ऊन से निर्मित है तथा पर्यावरण अनुकूल और सचेत जीवन का प्रतीक है), मणिपुर की लोकतक चाय (लोकतक झील के आसपास रसायनों के बिना उगाई जाने वाली प्रीमियम हस्तनिर्मित चाय) और रवींद्रनाथ टैगोर की कृतियों का संग्रह ('वर्ड्स ऑफ़ द मास्टर' सहित टैगोर का साहित्य, जिनका 1913 में नोबेल पुरस्कार मिलने के बाद स्वीडन से विशेष बौद्धिक जुड़ाव था) भेंट किया गया।

क्राउन प्रिंसेस विक्टोरिया को पारंपरिक गोंड चित्रकला उपहार स्वरूप भेंट की गई, जो मध्य प्रदेश के गोंड समुदाय की प्रकृति और जंगलों को दर्शाती जीवंत आदिवासी कला है। इसके अलावा 'कन्वीनिएंट एक्शन - कंटिन्यूटी फॉर चेंज' पुस्तक भी दी गई, जो प्रधानमंत्री मोदी द्वारा लिखित नीतिगत विचारों और सुशासन पर केंद्रित पुस्तक है।

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति को उपहार में जीवन वृक्ष की रोगन पेंटिंग (गुजरात के कच्छ क्षेत्र की दुर्लभ वस्त्र कला, जो विकास और निरंतरता को दर्शाती है), कृषि उत्पाद में केसर आम और मेघालय के अनानास (गुजरात के जूनागढ़ के विश्व प्रसिद्ध जीआई-टैग वाले 'केसर आम' और मेघालय के प्रीमियम अनानास) दिया है।

यूएई की राजमाता (महारानी मां) को करीमनगर फ़िलिग्री बॉक्स (तेलंगाना के करीमनगर की चांदी की बारीक कलाकृति, जिस पर शाही हाथी का जुलूस अंकित है), माहेश्वरी रेशमी कपड़ा (मध्य प्रदेश के महेश्वर की ऐतिहासिक हथकरघा परंपरा, जो रानी अहिल्याबाई होल्कर के इतिहास से जुड़ी है) और चक हाओ चावल (मणिपुर का प्रसिद्ध सुगंधित काला चावल, जिसे कभी शाही चावल माना जाता था) उपहार स्वरूप दिया गया।

यूएई के युवराज को कोफ्तगारी डैगर (कटार), (उदयपुर के कारीगरों द्वारा स्टील पर सोने-चांदी के तारों से नक्काशी कर बनाई गई पारंपरिक कटार, जो यूएई की खंजर संस्कृति से मेल खाती है), मिथिला मखाना (जीआई टैग) (बिहार के मिथिला क्षेत्र का पोषक तत्वों से भरपूर फॉक्स नट्स) भेंट किए गए।

डेनमार्क के प्रधानमंत्री को बिदरी चांदी का गुलदस्ता (हैदराबाद और दक्कन क्षेत्र की प्रसिद्ध धातु शिल्प कला, जिस पर चांदी की बारीक जड़ाई की गई है) दिया गया है।

आइसलैंड के प्रधानमंत्री को तेनजिंग नोर्गे की बर्फ की कुल्हाड़ी की प्रतिकृति (1953 में माउंट एवरेस्ट की पहली सफल चढ़ाई के दौरान उपयोग की गई कुल्हाड़ी की स्टील-लकड़ी की प्रतिकृति, जो आइसलैंड के ग्लेशियरों और साहसिक संस्कृति से जुड़ती है) दिया गया है।

फिनलैंड के प्रधानमंत्री को कमल तलाई पिछवाई की एक पेंटिंग (जो राजस्थान की नाथद्वारा शैली से जुड़ी एक पारंपरिक कलाकृति है) उपहार स्वरूप भेंट की गई।

इसके अलावा, खाद्य एवं कृषि संगठन के महानिदेशक को बाजरे की पौष्टिक बार का सेट (महाराष्ट्र सोलापुर, अहमदनगर की शुष्क जलवायु में उगने वाले ज्वार और बाजरे की पौष्टिक विरासत का प्रदर्शन), भारत के सर्वश्रेष्ठ पारंपरिक अनाजों के नमूने (इसमें केरल का मट्टा ‘लाल’ चावल, पश्चिम बंगाल का गोबिंदोभोग चावल, भारत-गंगा के मैदानों का बासमती चावल, असम का जोहा चावल और उत्तर प्रदेश का कालानमक ‘बुद्ध’ चावल शामिल हैं) दिया गया।

ये उपहार भारत की 'लोकल टू ग्लोबल' पहल और सांस्कृतिक कूटनीति के जीवंत उदाहरण हैं, जो वैश्विक मंच पर स्थानीय कारीगरों और जीआई उत्पादों को पहचान दिलाते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी

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