गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप खतरे की घंटी, इसे न करें नजरअंदाज- एम्स

22 May 2026 18:02:53
एम्स के


नई दिल्ली, 22 मई (हि.स.)। गर्भावस्था के दौरान बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर ( उच्च रक्तचाप) मां और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। वर्ल्ड प्रीक्लेम्पसिया डे के अवसर पर शुक्रवार को आखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि गर्भावस्था में 140/90 से अधिक ब्लड प्रेशर को कभी भी सामान्य नहीं माना जाना चाहिए।

एम्स में आयोजित पत्रकार वार्ता में

विशेषज्ञ पैनल में शामिल डॉ नीना मल्होत्रा, डॉ के अपर्णा शर्मा, डॉ विदुषी कुलश्रेष्ठ और डॉ अनुभूति राणा ने प्रीक्लेम्पसिया गर्भावस्था से जुड़ी कई बातों को साझा किया। डॉ. नीना मल्होत्रा ने कहा कि प्रीक्लेम्पसिया एक गंभीर स्थिति है, जिसमें हाई ब्लड प्रेशर के साथ शरीर के अन्य अंगों, खासकर किडनी और लिवर पर भी असर पड़ सकता है। समय रहते पहचान और इलाज न मिलने पर यह स्थिति मां और बच्चे दोनों की जान को खतरे में डाल सकती है।

डॉक्टरों ने कहा कि लगातार सिरदर्द, आंखों के सामने धुंधलापन, हाथ-पैरों में सूजन, अचानक वजन बढ़ना और पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। नियमित जांच और ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग से इस बीमारी का शुरुआती चरण में पता लगाया जा सकता है।

स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के विशेषज्ञों ने गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारों से अपील की कि गर्भावस्था के दौरान किसी भी तरह के हाई ब्लड प्रेशर को हल्के में न लें और समय-समय पर डॉक्टर से जांच जरूर कराते रहें।

डॉक्टर के मुताबिक प्रीक्लेम्पसिया की स्क्रीनिंग गर्भावस्था की पहली तिमाही में ही संभव है। हाई रिस्क महिलाओं को समय पर लो-डोज एस्पिरिन देने से गंभीर प्रीक्लेम्पसिया का खतरा 60 फीसदी तक कम किया जा सकता है। डॉक्टरों ने नियमित एंटीनटल चेकअप, ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग और चेतावनी वाले लक्षणों को नजरअंदाज न करने की सलाह दी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

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