विपक्ष के हंगामे के बीच राज्यपाल ने पूरा अभिभाषण पढ़ा, शांति, स्थिरता और समग्र विकास पर दिया जोर

22 May 2026 17:08:53
राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य शुक्रवार को असम विधानसभा में अभिभाषण प्रस्तुत करते हुए।


गुवाहाटी, 22 मई (हि.स.)। असम विधानसभा के प्रथम सत्र के दूसरे दिन शुक्रवार को सदन की कार्यवाही राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य के अभिभाषण के साथ शुरू हुई। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 176(1) के तहत दिए गए अपने संबोधन में राज्यपाल ने राज्य में शांति एवं स्थिरता, आर्थिक विकास, अवैध घुसपैठ रोकने तथा भाषाई और सांस्कृतिक पहचान की सुरक्षा के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। हालांकि अभिभाषण के दौरान सदन में विपक्ष के जोरदार हंगामे के कारण माहौल काफी तनावपूर्ण बना रहा।

राज्यपाल के संबोधन के दौरान विपक्षी दलों के विधायक हाथों में प्लेकार्ड लेकर सदन में नारेबाजी करते नजर आए। अभिभाषण शुरू होने के कुछ ही देर बाद कांग्रेस पार्टी के विधायकों ने महंगाई और आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। कांग्रेस सदस्यों ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकार महंगाई पर नियंत्रण करने में विफल रही है।

विरोध कर रहे विधायक अध्यक्ष और राज्यपाल के आसन के सामने पहुंचकर नारे लगाने लगे, जिससे सदन में तीखी नोकझोंक की स्थिति उत्पन्न हो गई। भारी शोर-शराबे और विरोध के बावजूद राज्यपाल ने अपना पूरा अभिभाषण जारी रखा और निर्धारित संबोधन पूरा किया।

अभिभाषण समाप्त होने के बाद कांग्रेस विधायकों ने विरोधस्वरूप सदन से वॉकआउट कर दिया। वहीं विधायक अखिल गोगोई ने भी लगातार हस्तक्षेप करते हुए कहा कि राज्यपाल के भाषण में असम की वास्तविक स्थिति को सही ढंग से प्रस्तुत नहीं किया गया है।

इससे पहले अपने संबोधन की शुरुआत राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने ऋग्वेद के एक श्लोक के साथ की। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से मतभेदों से ऊपर उठकर राज्य के लोगों के कल्याण, शांति और विकास के लिए मिलकर कार्य करने का आह्वान किया।

राज्यपाल ने कहा कि हाल ही में संपन्न चुनावों में जनता द्वारा दिया गया स्पष्ट जनादेश लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास और सरकार की नीतियों के प्रति समर्थन को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि सरकार शांति, आर्थिक स्थिरता और समग्र विकास के एजेंडे पर तेजी से काम कर रही है।

आर्थिक विकास का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में असम की सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में लगभग 16 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि असम वर्ष 2028-29 तक 10 लाख करोड़ रुपये की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके साथ ही राज्य की प्रति व्यक्ति आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है तथा वर्ष 2025-26 में पूंजीगत व्यय वर्ष 2020-21 की तुलना में दोगुना हो गया है।

राज्यपाल ने अपने अभिभाषण में अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा और घुसपैठ को रोकने के लिए सरकार की ओर से कठोर कदम उठाए जाने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि सरकार सामाजिक समरसता, साझा सांस्कृतिक मूल्यों और व्यापक असमिया समाज को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयासरत है।

उन्होंने कहा कि श्रीमंत शंकरदेव के आदर्शों से प्रेरित होकर राज्य सरकार असम की भाषाई, सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही स्वदेशी और जनजातीय समुदायों के अधिकारों, परंपराओं, भूमि और विरासत की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी सरकार निरंतर कार्य कर रही है।

राज्यपाल ने अपने अभिभाषण का समापन असमिया साहित्यकार लक्ष्मीनारायण बेज़बरुआ की कविता की पंक्तियों और स्वामी विवेकानंद के प्रेरणादायी विचारों के साथ किया।------------

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश

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