एनएचएआई ने एनजीआई के साथ एक समझौता ज्ञापन पर किए हस्ताक्षर

22 May 2026 18:08:54
प्रतीकात्मक चित्र


नई दिल्ली, 22 मई (हि.स.)। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने राष्ट्रीय राजमार्ग अवसंरचना के विकास के लिए तकनीकी विशेषज्ञता को मजबूत करने के उद्देश्य से हाल ही में नॉर्वे के जियोटेक्निकल इंस्टीट्यूट (एनजीआई) के साथ ओस्लो में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार यह सहयोग भारत के राष्ट्रीय राजमार्गों को वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित और रखरखाव करने के प्रति एनएचएआई की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्य सुरंग निर्माण, ढलान स्थिरता विश्लेषण, ढलानों की निगरानी और संस्थागत क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण अवसंरचना परियोजनाओं की योजना, डिजाइन, मूल्यांकन और निगरानी में सहयोग के लिए उन्नत अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञता का लाभ उठाना है।

इस समझौते के तहत एनजीआई विभिन्न परामर्श सेवाएं प्रदान करेगा। इनमें सुरंग परियोजनाओं के लिए स्थल का विशिष्टीकरण, आगामी सुरंग परियोजनाओं के लिए व्यवहार्यता अध्ययन और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करना, परिचालन सुरंगों का संरचनात्मक मूल्यांकन और सुरक्षा लेखापरीक्षा, संभावित खतरों की पहचान करने और उपयुक्त शमन उपायों की सिफारिश करने के लिए उन्नत ढलान स्थिरता मूल्यांकन तथा ढलानों के लिए इनसार डेटा का विश्लेषण और व्याख्या तथा प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों का विकास करना शामिल है।

इस समझौते में संस्थागत क्षमता निर्माण और ज्ञान आदान-प्रदान पर विशेष जोर दिया गया है। दोनों संगठन प्राकृतिक आपदाओं को कम करने से संबंधित अनुसंधान और विकास पहलों पर सहयोग करेंगे। संयुक्त कार्यशालाओं, सेमिनारों, तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रमों और विशेष तकनीकी साहित्य के प्रकाशन के माध्यम से राजमार्ग क्षेत्र की तकनीकी क्षमताओं को बढ़ाया जाएगा।

यह समझौता ज्ञापन पांच वर्षों की अवधि के लिए वैध रहेगा। यह समझौता परियोजना-दर-परियोजना आधार पर लागू होगा। इससे प्रत्येक पक्ष को आवश्यकतानुसार अन्य संगठनों के साथ स्वतंत्र रूप से सहयोग करने की सुविधा मिलेगी।

एनएचएआई और एनजीआई के बीच इस सहयोग से सुरक्षित, टिकाऊ तथा विश्व स्तरीय राष्ट्रीय राजमार्ग अवसंरचना के विकास में तकनीकी क्षमताओं को मजबूती मिलेगी। यह साझेदारी अवसंरचना विकास, प्रौद्योगिकी आदान-प्रदान और टिकाऊ इंजीनियरिंग पद्धतियों के क्षेत्र में भारत तथा नॉर्वे के बीच बढ़ते सहयोग को दर्शाती है, जिससे द्विपक्षीय संबंध और गहरे होंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी

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