नई दिल्ली, 23 मई (हि.स.)। देश की आस्था, संस्कृति और परंपरा की रक्षा एवं जनजागृति के उद्देश्य से दिल्ली में रविवार को एक विशाल 'जनजाति सांस्कृतिक समागम' का आयोजन किया जाएगा। गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह लाल किले में कल शाम करीब 06:00 बजे इसका उद्घाटन करेंगे।
आयोजकों की ओर से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस मौके पर मुख्य़ अतिथि अमित शाह, विशिष्ट अतिथियों में राष्ट्रीय संयोजक, जनजाति सुरक्षा मंच, जशपुर (छत्तीसगढ़) गणेशराम भगत, जनजाति सुरक्षा मंच एवं जनजाति जागृति समिति के आयोजक, राष्ट्रीय सह संयोजक जनजाति सुरक्षा मंच झारखण्ड, डॉ. राजकिशोर हांसदा, अ.भा. वनवासी कल्याण आश्रम जशपुर के अध्यक्ष सत्येन्द्र सिंह खरवार, देशभर के आदिवासी नेता, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ (बस्तर), अरुणाचल प्रदेश और तेलंगाना के प्रमुख प्रतिनिधि, साधु-संत सहित अन्य लोग मौजूद रहेंगे।
इसमें कई राज्यों के वन क्षेत्रों के एक लाख से अधिक वनवासी समाज के लोग दिल्ली की धरती पर अपनी संस्कृति, अनूठी परंपरा और गौरव का भव्य प्रदर्शन करेंगे। इससे पहले चांदनी चौक के सांसद प्रवीन खंडेलवाल 'वनवासी सांस्कृतिक शोभा यात्रा' को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। इस दौरान, लोक संस्कृति के अनूठे रंगों, पारंपरिक वेशभूषा, लोक नृत्य और संगीत के उत्सव का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। यह भव्य यात्रा दोपहर 3 बजे अजमेरी गेट चौक से शुरू होकर कई मार्गों से गुजरेगी। इनमें अजमेरी गेट चौक, बाजार अजमेरी गेट, हौज काजी, चावड़ी बाजार, बादशाह बुला, नई सड़क, घंटा घर चांदनी चौक शामिल है। इस यात्रा का समापन लाल किला में होगा।
वनवासी समाज के लोग अपनी पारंपरिक वेशभूषा, दुर्लभ लोक नृत्यों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए भारत की समृद्ध तथा प्राचीन विरासत को दिल्ली के सामने जीवंत करेंगे। इस दौरान संगीत और उल्लास का माहौल रहेगा। पूरे रास्ते में कहीं शहनाई की मधुर धुन गूंजेगी, कहीं ढोल-नगाड़ों की थाप वातावरण को उत्सवमय बनाएगी, तो कहीं बैंड-बाजों और लोक कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुतियां आकर्षण का मुख्य केंद्र होंगी। यात्रा मार्ग में स्थानीय नागरिकों, व्यापारिक मंडलों और सामाजिक संगठनों द्वारा पुष्प वर्षा कर वनवासी भाई-बहनों का पारंपरिक अभिनंदन किया जाएगा।
आयोजकों के अनुसार यह आयोजन केवल एक शोभा यात्रा नहीं है बल्कि यह एक भारत-श्रेष्ठ भारत की मूल भावना का विराट उत्सव है। इसमें भारत की विविधता, सदियों पुरानी परंपरा और सामाजिक समरसता का एक ऐसा अनुपम दर्शन होगा जो आधुनिक पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी