पद्मभूषण से 25 मई को सम्मानित होंगे भगत सिंह कोश्यारी

24 May 2026 19:02:56
भगत सिंह  कोश्यारी फाइल चित्र।


देहरादून, 24 मई (हि.स.)। पूर्व राज्यपाल और पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी 25 मई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की ओर से नई दिल्ली में पद्मभूषण से सम्मानित किया जाएगा। केंद्र सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, उत्तराखंड में 'भगत दा' के नाम से लोकप्रिय कोश्यारी को शिक्षा, समाज सेवा, राजनीति और राष्ट्र निर्माण में उनके दीर्घ योगदान के लिए यह सम्मान प्रदान किया जा रहा है।

भगत सिंह कोश्यारी का जन्म 17 जून 1942 को बागेश्वर जिले के पलानधुरा गांव में हुआ था। भगत सिंह कोश्यारी ने ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर शिक्षा और सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण पहचान बनाई। उन्होंने आगरा विश्वविद्यालय से संबद्ध अल्मोड़ा कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की और शुरुआती दौर में उत्तर प्रदेश के एटा जनपद में व्याख्याता के रूप में कार्य किया। बाद में उन्होंने स्वयं को शिक्षा और समाज सेवा के लिए समर्पित कर दिया।

वर्ष 1966 में उन्होंने सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में ‘सरस्वती शिशु मंदिर’ की स्थापना की, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा के अवसरों को मजबूती मिली। इसके साथ ही विवेकानंद इंटर कॉलेज की स्थापना में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। वह लंबे समय तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे और उत्तरांचल उत्थान परिषद के सचिव के रूप में भी कार्य किया। सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने हिंदी साप्ताहिक 'पर्वत पीयूष' का प्रकाशन भी शुरू किया।

वर्ष 1997 में कोश्यारी को उत्तर प्रदेश विधान परिषद के लिए नामित किया गया था। नवंबर 2000 में उत्तराखंड के गठन के बाद, वह राज्य के पहले मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री बने और बाद में थोड़े समय के लिए उत्तरांचल (अब उत्तराखंड) के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। उन्होंने उत्तराखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में भी काम किया। वर्ष 2008 में, वह राज्यसभा के लिए चुने गए और 2014 में, वह नैनीताल-ऊधम सिंह नगर निर्वाचन क्षेत्र से लोक सभा के लिए चुने गए। उत्तराखंड में ऊर्जा मंत्री के रूप में, उन्होंने लंबे समय से लंबित टिहरी हाइड्रो परियोजना को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसमें टिहरी के ऐतिहासिक शहर और जिला मुख्यालय का स्थानांतरण शामिल था। उन्होंने राज्य सभा और लोक सभा दोनों में याचिका समिति के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया, जहां उन्होंने ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन सहित वन रैंक वन पेंशन, रेल कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे के विकास जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक मुद्दों पर विस्तृत सिफारिशें प्रस्तुत कीं। बाद में उन्हें 5 सितंबर, 2019 को महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने प्रभावी ढंग से सेवा की और राज्य के लगभग सभी जिलों के साथ-साथ कई ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण किलों का दौरा किया। इसके अलावा, अगस्त 2020 में, उन्हें गोवा के राज्यपाल (अतिरिक्त प्रभार) के रूप में भी नियुक्त किया गया था।

शिक्षा और राजनीति में उनके योगदान के अलावा, श्री कोश्यारी एक लेखक भी हैं। उन्होंने उत्तरांचल प्रदेश क्यों और उत्तरांचल प्रदेश: संघर्ष एवं समाधान नामक दो पुस्तकें लिखी और प्रकाशित की, जो उत्तराखंड के विकास के प्रति उनकी संकल्पना और प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। उनका जीवन राष्ट्र के प्रति समर्पण, नेतृत्व और अटूट सेवा का एक प्रेरक उदाहरण है।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

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