स्टॉक मार्केट में एनएफपी संपूर्ण फूड्स की निराशाजनक शुरुआत, कमजोर लिस्टिंग के बाद लगा लोअर सर्किट

युगवार्ता    25-May-2026
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प्रतीकात्मक


नई दिल्ली, 25 मई (हि.स.)। ड्राई फ्रूट का कारोबार करने वाली कंपनी एनएफपी संपूर्ण फूड्स के शेयरों ने आज स्टॉक मार्केट में कमजोर एंट्री करके अपने आईपीओ निवेशकों को निराश कर दिया। आईपीओ के तहत कंपनी के शेयर 55 रुपये के भाव पर जारी किए गए थे। आज एनएसई के एसएमई प्लेटफॉर्म पर इसकी लिस्टिंग 0.91 प्रतिशत डिस्काउंट के साथ 54.50 रुपये के स्तर पर हुई। लिस्टिंग के थोड़ी देर बाद ही कंपनी के शेयर बिकवाली के दबाव में गिर कर 51.80 रुपये के लोअर सर्किट लेवल तक आ गए। इस तरह पहले दिन के कारोबार में ही कंपनी के आईपीओ निवेशकों को प्रति शेयर 3.20 रुपये यानी 5.82 प्रतिशत का नुकसान हो गया।

एनएफपी संपूर्ण फूड्स का 24.53 करोड़ रुपये का आईपीओ 18 से 20 मई के बीच सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों की ओर से फीका रिस्पॉन्स मिला था, जिसके कारण ये ओवरऑल 1.57 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इनमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (क्यूआईबी) के लिए रिजर्व पोर्शन फुली सब्सक्राइब हुआ था। नॉन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (एनआईआई) के लिए रिजर्व पोर्शन में सिर्फ 34 प्रतिशत सब्सक्रिप्शन आया था। इसी तरह रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए रिजर्व पोर्शन 2.80 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इस आईपीओ के तहत 10 रुपये फेस वैल्यू वाले 44.60 लाख नए शेयर जारी किए गए हैं। आईपीओ के जरिये जुटाए गए पैसे का इस्तेमाल कंपनी अपने पुराने कर्ज के बोझ को कम करने, वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों में करेगी।

कंपनी की वित्तीय स्थिति की बात करें, तो कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास जमा कराए गए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) में किए गए दावे के मुताबिक इसकी वित्तीय सेहत उतार चढ़ाव के बावजूद मजबूत हुई है। वित्त वर्ष 2022-23 में कंपनी को 41 लाख रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था, जो अगले वित्त वर्ष 2023-24 में घट कर 15 लाख रुपये हो गया। इसके अगले वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी शुद्ध लाभ उछल कर 2.67 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। पिछले वित्त वर्ष में अप्रैल से 30 नवंबर 2025 तक कंपनी को 3.49 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हो चुका था। इस दौरान कंपनी की राजस्व प्राप्ति में भी उतार चढ़ाव के बावजूद बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2022-23 में इसे 16.75 करोड़ का कुल राजस्व प्राप्त हुआ, जो वित्त वर्ष 2023-24 में घट कर छह करोड़ और वित्त वर्ष 2024-25 में उछल कर 35.76 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। पिछले वित्त वर्ष में अप्रैल से 30 नवंबर 2025 तक कंपनी को 36.96 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो चुका था।

इस अवधि में कंपनी के कर्ज में लगातार बढ़ोतरी होती रही। वित्त वर्ष 2022-23 के अंत तक कंपनी पूरी तरह से कर्ज मुक्त थी, लेकिन वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी पर 8.53 करोड़ रुपये के कर्ज का बोझ आ गया। वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी पर कर्ज का बोझ उछल कर 11.36 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। पिछले वित्त वर्ष में 30 नवंबर 2025 तक कंपनी पर लदे कर्ज का बोझ बढ़ कर 24.94 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया था।

इस अवधि में कंपनी के नेटवर्थ में उतार चढ़ाव के बावजूद बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2022-23 में ये 8.54 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2023-24 में घट कर 6.34 करोड़ रुपये हो गया। इसी तरह 2024-25 में कंपनी का नेटवर्थ 9.02 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। वहीं पिछले वित्त वर्ष में 30 नवंबर 2025 तक ये 15.70 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।

इसी तरह ईबीआईटीडीए (अर्निंग बिफोर इंट्रेस्ट, टैक्सेज, डिप्रेशिएशंस एंड एमॉर्टाइजेशन) 2022-23 में 77 लाख रुपये के स्तर पर था, जो 2023-24 में कम होकर 56 लाख रुपये हो गया। इसी तरह 2024-25 में कंपनी का ईबीआईटीडीए बढ़ कर 4.69 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। वहीं पिछले वित्त वर्ष में 30 नवंबर 2025 तक ये 6.64 करोड़ रुपये के स्तर पर रहा।

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हिन्दुस्थान समाचार / योगिता पाठक

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