



- मुख्यमंत्री ने भोजशाला में मां वाग्देवी के दर्शन-पूजन कर धार को दी 88.04 करोड़ रुपये के 12 विकास कार्यों की सौगात
भोपाल, 25 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि धार स्थित भोजशाला परिसर में राज्य सरकार भव्य सरस्वती लोक बनाएगी और राजा भोज संस्थान की स्थापना भी की जायेगी। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक भोजशाला पर उच्च न्यायालय ने जो निर्णय दिया है, राज्य सरकार इस न्यायिक आदेश का अक्षरश: पालन कराएगी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को धार में जल गंगा संवर्धन अभियान के राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राजा भोजपाल द्वारा स्थापित यह भोजशाला सदियों तक ज्ञान-विज्ञान-अनुसंधान और संस्कृत भाषा का सबसे प्रखर केन्द्र रहा है। यह हमारी प्राचीन भारतीय ज्ञान परम्परा का अटूट प्रतीक है। यहाँ दूर-दूर से छात्र और विद्वान ज्ञान अर्जित करने और शास्त्रों पर विमर्श करने आते थे। राज्य सरकार भोजशाला के उसी गौरवशाली अतीत को पुनर्जीवित करने के लिए सभी जरूरी प्रयास करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजा भोज की इस पुण्य धरा (धार) में अब चहुंमुखी विकास की नई धारा बहेगी। धार के आसपास पुरात्व विभाग से समन्वय कर सभी प्रकार के विकास कार्य किए जाएगे। उन्होंने कहा कि राजा भोज जल संरक्षण के अग्रदूत थे। उनके द्वारा निर्मित विशाल जलाशय, तालाब और जल प्रबंधन की व्यवस्थाएं आज भी उनकी अद्भुत दूरदर्शिता एवं जल नियोजन का प्रमाण हैं। धार को किसी समय तालाबों की नगरी कहा जाता था। राजा भोज ने इस शहर में जलापूर्ति के लिए यहां साढ़े 12 तालाबों का निर्माण कराया गया था और इन्हें आपस में इस तरह से जोड़ा गया था कि एक तालाब भरने पर उसका अतिरिक्त पानी दूसरे तालाब में स्वत: चला जाता था।
गंगा दशहरा पर सोमवार को प्रदेशव्यापी जल संरक्षण कार्यक्रम आयोजित किये गये। मुख्यमंत्री ने धार में हुए राज्य स्तरीय कार्यक्रम में सहभागिता की। मुख्यमंत्री ने मां वाग्देवी के सम्मान में धार में भव्य सरस्वती लोक बनाए जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह राजा भोज की कर्मस्थली है, इसीलिए धार में राजा भोज शोध संस्थान की भी स्थापना की जायेगी। भोपाल में भी राजा भोज का संग्रहालय बनाया जा रहा है।
इस अवसर पर केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री सावित्री ठाकुर, नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, विधायकगण नीना विक्रम वर्मा व कालू सिंह ठाकुर सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण तथा बड़ी संख्या में नागरिकगण उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने यहां 88.04 करोड़ रुपये की लागत वाले 12 विकास कार्यों का भूमिपूजन कर जिलेवासियों को सौगात दी। इसमें 27.21 करोड़ रुपये की लागत से चंबल नदी पर लेबड़-घाटाविल्लौद मार्ग पर फोरलेन उच्च स्तरीय पुल निर्माण कार्य का भूमिपूजन भी शामिल है।
भोजशाला आंदोलन में शहादत देने वाले तीन शहीदों के परिजन को दिए जाएंगे 5-5 लाख रुपये
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोजशाला के लिए हुए आंदोलन में शहादत देने वाले तीन शहीदों स्व. बनसिंह, स्व. अंतरसिंह एवं स्व. लक्ष्मण सिंह के निकटतम परिजन को राज्य सरकार की ओर से 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। कार्यक्रम के दौरान तीनों शहीदों के सम्मान में मौन रखकर इन्हें श्रद्धांजलि दी गई। मुख्यमंत्री ने विभिन्न शासकीय योजनाओं के पात्र हितग्राहियों को मंच से हितलाभ भी वितरित किए। मुख्यमंत्री ने भोजशाला में मां वाग्देवी के दर्शन कर विधि विधान से पूजन-अर्चन किया और वाग्देवी से प्रदेश की सुख-समृद्धि और नागरिकों की खुशहाली की कामना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उच्च न्यायालय के निर्णय से 750 वर्ष का संषर्घ सफल हुआ है। धार में नए युग की शुरुआत हुई है। उन्होंने इसके लिए न्यायालय का आभार व्यक्त किया। प्रदेश की जनता को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि धार अब प्रदेश में औद्योगिक श्रेणी में सबसे अग्रणी जिला बनकर उभरा है। राज्य सरकार मां वाग्देवी के आशीर्वाद से विकास के क्रम में आगे बढ़ने का संकल्प लिया है। यहां भव्य माता सरस्वती लोक का निर्माण किया जाएगा। धार में राजा भोज शोध संस्थान भी बनाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि राजा भोज ने जल संरक्षण के लिए अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए। गंगा दशमी पर्व राजा भोज की धरती पर मनाना हम सभी के लिए गौरवशाली क्षण है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में जल संरक्षण की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। मध्य प्रदेश इस मामले में देश में प्रथम स्थान पर है, यह प्रदेशवासियों के लिए गौरव की बात है। प्रदेश के नागरिकों की सहभागिता से जल संरक्षण के लिए 2 लाख 42 हजार 188 कार्य करने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके तहत प्रदेशभर में 2500 करोड़ रुपये लागत के कार्य प्रगति पर हैं। प्रदेश में 89 हजार 772 कुओं को रिचार्ज किया गया है, 55 हजार से अधिक खेत तालाब बनाए गए और अब तक 105 अमृत सरोवरों का निर्माण किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजा भोज के द्वारा संरक्षित पुरातत्व के महत्व के अनेक स्थान और भोजपत्र हमारी धरोहर हैं। उन्होंने भोपाल के पास भोजपुर में विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग का निर्माण कराया। भोपाल के बड़े तालाब की निर्माण तकनीक देखकर दुनिया के बड़े-बड़े विद्वान अचंभित रह जाते हैं। राजा भोज ने 45 फीट लंबे लौह स्तंभ का भी निर्माण कराया, जिसके संदर्भ में अरब के इतिहासकार अलबलूनी ने कहा कि विश्व में ऐसा स्तंभ नहीं देखा, जिस लौह स्तंभ पर कभी जंग नहीं लगी। यह मालवा की धरोहर है। राजा भोज ने कवियों का सम्मेलन कराया और उनकी एक-एक रचना के लिए सोने की ईंट देकर पुरस्कृत किया। आज भी राजा भोज के अतीत की घटनाएं हम सभी को गौरवान्वित करती हैं। उन्होंने वीरता, धीरता, पराक्रमशीलता और गंभीरता के पैमाने पर उनका समवर्ती कोई राजा आसपास नजर नहीं आता है। दक्षिण में तमिलनाडु के पास भी एक भोज मंदिर देखने को मिलता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर