
नई दिल्ली, 25 मई (हि.स.)। डाक विभाग का राजस्व वित्त वर्ष 2025-26 में 15.8 प्रतिशत बढ़कर 15,373 करोड़ रुपये पहुंच गया है। पिछले वित्त वर्ष में विभाग का राजस्व लगभग 13,273 करोड़ रुपये था। इस वर्ष विभाग के राजस्व में 2,100 करोड़ रुपये की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि पिछले कई वर्षों में औसतन 200 से 300 करोड़ रुपये की वार्षिक वृद्धि होती रही थी। संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी ने इसे विभाग के 170 वर्ष के इतिहास की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक बताया है।
डॉ. पेम्मासानी ने एक कार्यक्रम में जानकारी देते हुए कहा कि इंडिया पोस्ट की पार्सल और लॉजिस्टिक्स सेवाओं में 70 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है। तकनीकी एकीकरण और ई-कॉमर्स कंपनियों के साथ साझेदारी के कारण विभाग की पार्सल सेवाओं में तेजी आई है। जब वर्तमान नेतृत्व ने कार्यभार संभाला था तब पार्सल सेवाओं से राजस्व लगभग 600 करोड़ रुपये था, जबकि अब इस क्षेत्र में 10,000 करोड़ रुपये तक राजस्व क्षमता आंकी जा रही है।
उन्होंने कहा कि ओटीपी आधारित डिलीवरी, एसएमएस ट्रैकिंग, यूपीआई और डिजिटल भुगतान जैसी सुविधाओं के कारण सेवाएं अधिक प्रभावी हुई हैं। विभाग ने मार्गों के पुनर्गठन के बाद छह महानगरों में 24 घंटे और 48 घंटे की स्पीड पोस्ट डिलीवरी सेवा भी शुरू की है।
राज्य मंत्री ने कहा कि आईटी 2.0 के तहत एडवांस्ड पोस्टल टेक्नोलॉजी पहल में 5,800 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। इसके तहत बचत योजनाओं और डाक जीवन बीमा सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल बनाया जा रहा है ताकि लोग बिना डाकघर गए ऑनलाइन सेवाओं का लाभ उठा सकें। नई व्यवस्था के तहत लोग एक क्लिक पर बचत योजनाएं और बीमा पॉलिसियां खरीद सकेंगे तथा परिपक्वता राशि सीधे बैंक खाते में प्राप्त कर सकेंगे।
डॉ. पेम्मासानी ने कहा कि डाक विभाग की बचत योजनाओं पर चार प्रतिशत ब्याज दिया जा रहा है, जो कई प्रमुख वाणिज्यिक बैंकों की तुलना में अधिक है। उन्होंने कहा कि आईटी 2.0 के तहत फेस रिकग्निशन, ई-केवाईसी, आधार लिंकिंग और राष्ट्रीय क्लाउड सुरक्षा मानकों जैसी सुरक्षा व्यवस्थाएं भी लागू की जा रही हैं।
उन्होंने बताया कि इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के माध्यम से विभाग प्रतिवर्ष लगभग 45,000 करोड़ रुपये प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के जरिए वितरित कर रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने के लिए डाक कर्मियों को मोबाइल फोन, बायोमेट्रिक उपकरण और प्रिंटर उपलब्ध कराए गए हैं।
राज्य मंत्री ने कहा कि सुकन्या समृद्धि योजना के तहत अब तक 3.8 करोड़ बालिकाओं का नामांकन किया जा चुका है। इसके अलावा स्वयं सहायता समूहों, महिला बचत योजनाओं और ग्रामीण बचत खातों को भी ग्रामीण डाक सेवकों के माध्यम से बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्तमान में लगभग 2.5 लाख ग्रामीण डाक सेवक देशभर के गांवों में कार्यरत हैं।
उन्होंने कहा कि डाक विभाग कर्मचारियों के प्रशिक्षण और व्यवहार परिवर्तन पर भी विशेष ध्यान दे रहा है। प्रत्येक 100 कर्मचारियों के समूह को ग्राहक सेवा, संवाद और सेवा वितरण से जुड़े प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं। शहरी डाकघरों के आधुनिकीकरण पर 60 से 70 लाख रुपये प्रति डाकघर खर्च किए जा रहे हैं। विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में नई पीढ़ी के डाकघर भी विकसित किए जा रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर