
नई दिल्ली, 25 मई (हि.स.)। केंद्रीय आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि भारत अब केवल स्वास्थ्य तकनीकों का उपभोक्ता नहीं बल्कि सस्ती और नवोन्मेषी हेल्थ टेक्नोलॉजी का वैश्विक केंद्र बनकर उभर रहा है। उन्होंने कहा कि विज्ञान और उद्योग के बीच मजबूत साझेदारी “विकसित भारत” के लक्ष्य को गति देगी।
वे रविवार को मानेकशॉ सेंटर में भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद द्वारा आयोजित बायोमेडिकल इनोवेशन और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय शोध और तकनीकों को उद्योगों से जोड़कर आम जनता तक पहुंचाना है।
कार्यक्रम में भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ने पहली बार इनोवेटर-इंडस्ट्री प्लेटफार्म लॉन्च किया और 41 सार्वजनिक स्वास्थ्य तकनीकों को उद्योगों को ट्रांसफर किया। इनमें वैक्सीन, डायग्नोस्टिक तकनीक, मेडिकल डिवाइस और अन्य बायोमेडिकल समाधान शामिल हैं।
इन तकनीकों में टायफाइड, पैराटायफाइड, जापानी इंसेफेलाइटिस, टीबी और एम पॉक्स जैसी बीमारियों से जुड़ी वैक्सीन और जांच तकनीकें शामिल हैं।
इसके अलावा पहली बार निष्क्रिय केएफडी और चांदीपुरा वायरस के बायोमैटेरियल भी उद्योग साझेदारों को सौंपे गए, जिससे वैक्सीन निर्माण और बायोमेडिकल रिसर्च को मजबूती मिलेगी।
इस मौके पर नीति आयोग के सदस्य गोबर्धन दास ने कहा कि भारत के पास स्वास्थ्य तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व करने की पूरी क्षमता है और यह पहल इनोवेशन तथा टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को नई दिशा देगी।
आईसीएमआर के महानिदेशक राजीव बहल ने कहा कि “ मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्रका उद्देश्य लैब में विकसित शोध को तेजी से लोगों तक पहुंचाना है।
कार्यक्रम के दौरान “ इंडियन बायोमेडिकल पेटेंट लैंडस्केप रिपोर्ट ” और “टेक्नॉलजी कॉम्पेंडियम ” भी जारी किए गए। साथ ही 100 से अधिक नई तकनीकों का प्रदर्शन किया गया, जिनमें डायग्नोस्टिक्स, थैरेप्यूटिक्स और मेडिकल डिवाइस शामिल रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी