यूसीसी पर सदन में बाेले मुख्यमंत्री- कांग्रेस में गीता और भागवत पर चर्चा करने का साहस नहीं है

27 May 2026 17:06:53
Assam CM Dr Himanta Biswa Addressing the Assam Assembly.


- कांग्रेस अब केवल कुरान और शरीयत की करती बात, गीता और भागवत की चर्चा करने का साहस नहीं

गुवाहाटी, 27 मई, (हि.स.)। असम विधानसभा में बुधवार को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आज की कांग्रेस ने सांप्रदायिक शक्तियों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अब केवल कुरान और शरीयत की बात करती है तथा उसमें गीता और भागवत पर चर्चा करने का साहस नहीं बचा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यूसीसी जनजातीय और आदिवासी समुदायों पर लागू नहीं होगा। उन्होंने कहा कि “जहां बीमारी है, वहीं दवा दी गई है”, इसलिए स्वदेशी और जनजातीय समाज को इससे बाहर रखा गया है। उन्होंने कहा कि यूसीसी का उद्देश्य विवाह, तलाक, संपत्ति और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े मामलों में समान कानून लागू करना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता के शुरुआती दौर में कांग्रेस के नेताओं ने ही देश में यूसीसी का सपना देखा था। उन्होंने कहा कि आज की कांग्रेस, लोकप्रिय गोपीनाथ बरदलै और लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की कांग्रेस नहीं रही। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अब एक विशेष धार्मिक समूह का प्रतिनिधित्व कर रही है।

सदन में अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि असम यूसीसी लागू करने वाला देश का तीसरा राज्य बनेगा। उन्होंने दावा किया कि एनडीए की बड़ी चुनावी सफलता भी यूसीसी के पक्ष में जनता की इच्छा को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि यूसीसी लागू होने के बाद पुत्र और पुत्री को संपत्ति में समान अधिकार मिलेगा तथा वैवाहिक विवाद के दौरान पति को पत्नी का भरण-पोषण करना अनिवार्य होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यूसीसी के तहत दूसरी शादी करने पर सात वर्ष तक की सजा का प्रावधान रहेगा। उन्होंने बहुविवाह के समर्थन को सभ्य समाज के लिए शर्मनाक बताया।

उन्होंने जनप्रतिनिधियों से धर्मनिरपेक्षता और संविधान का प्रतिनिधित्व करने का आह्वान करते हुए कहा कि यूसीसी का इतिहास बहुत पुराना है और भारत में वर्ष 1925 से ही इस दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश

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