
भोपाल, 27 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश सरकार ने बाल विवाह पर प्रभावी रोक लगाने और महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित अभियानों को जमीनी स्तर तक मजबूत बनाने के उद्देश्य से बड़ा निर्णय लिया है। सरकार ने पूर्व में जारी अधिसूचना को निरस्त करते हुए अब जिला से लेकर ग्राम स्तर तक विभिन्न प्रशासनिक अधिकारियों को “बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी” के रूप में अधिसूचित किया है।
यह निर्णय बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 की धारा 16 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों के तहत लिया गया है। भारत सरकार के निर्देशों के अनुपालन में नई व्यवस्था लागू की गई है, जिससे बाल विवाह की रोकथाम, निगरानी और त्वरित कार्रवाई को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
जनसम्पर्क अधिकारी बिन्दु सुनील ने बुधवार को बताया कि इस नई व्यवस्था के लागू होने से अब बाल विवाह रोकने के लिए एक बेहद मजबूत और त्रि-स्तरीय से भी बड़ा प्रशासनिक तंत्र काम करेगा। जिला स्तर पर इसकी कमान जिला कलेक्टर, अपर कलेक्टर और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी संभालेंगे, जबकि अनुभाग स्तर पर अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को यह जिम्मेदारी दी गई है। इसी तरह तहसील स्तर पर तहसीलदार और सभी नायब तहसीलदारों को कानूनन सशक्त बनाया गया है।
उन्होंने बताया कि ब्लॉक स्तर पर मोर्चा संभालते हुए जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी सीधे तौर पर जिम्मेदार होंगे। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के सेक्टर स्तर पर निगरानी रखने के लिए सभी राजस्व निरीक्षकों और महिला एवं बाल विकास विभाग की पर्यवेक्षकों की तैनाती की गई है। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव जमीनी स्तर पर करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में सीधे पटवारी को और शहरी क्षेत्रों में नगर पालिक निगमों के जोनल अधिकारी, राजस्व अधिकारी, सहायक राजस्व अधिकारी और स्वास्थ्य अधिकारियों को इस कानून को लागू करने का जिम्मा सौंपा गया है। इसके अलावा छोटे शहरों की नगर पालिका परिषदों और नगर परिषदों में मुख्य नगर पालिका अधिकारी, राजस्व निरीक्षक, उप राजस्व निरीक्षक और मुख्य स्वच्छता निरीक्षकों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी नियुक्त किया गया। ग्राम स्तर तक प्रशासनिक जवाबदेही तय होने से बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति पर प्रभावी अंकुश लगेगा तथा बालिकाओं की शिक्षा, सुरक्षा और अधिकारों को बेहतर संरक्षण मिलेगा।
जनसम्पर्क अधिकारी के अनुसार, अब अगर कहीं से भी बाल विवाह की सूचना मिलती है, तो वहां के पटवारी या सेक्टर पर्यवेक्षक कानूनी तौर पर सीधे दखल दे सकेगा और उसे रोकने के लिए अधिकृत होगा। अधिकारियों की इतनी बड़ी चेन होने से अब शादियों के सीजन में 'चाइल्ड मैरिज' पर पूरी तरह से नकेल कसी जा सकेगी। राज्य शासन ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
2020 से 2025 के बीच बाल विवाह के 2,916 मामले
मध्य प्रदेश में बाल विवाह के वर्ष 2025 में 538 मामले दर्ज किए गए थे। वहीं 2020-2025 के बीच 2,916 नाबालिगों की शादी के मामले सामने आए, जिनमें 2020 में 366 की तुलना में 2025 तक 47 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
मध्य प्रदेश में बाल विवाह की रोकथाम के लिए वर्ष 2013 में 'लाडो अभियान' की शुरुआत की गई थी। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से लोगों की मानसिकता में सकारात्मक बदलाव लाकर इस कुरीति को समाप्त करना है। इस अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 2014 में इसे लोक प्रशासन में उत्कृष्टता के लिए प्रधानमंत्री पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर