
नई दिल्ली, 27 मई (हि.स.)। केंद्र सरकार ने बुधवार को भारत के राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा (नेशनल हेल्थ अकाउंट्स-एनएचए) 2022-23 की रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट के अनुसार पिछले एक दशक में देश में स्वास्थ्य क्षेत्र पर सरकारी खर्च में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जबकि लोगों की जेब से होने वाला इलाज खर्च लगातार कम हुआ है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी रिपोर्ट में बताया गया कि वर्ष 2013-14 से 2022-23 के बीच सरकारी स्वास्थ्य व्यय (जीएचई) तीन गुना बढ़कर 1.30 लाख करोड़ रुपये से 3.85 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। इसी अवधि में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में स्वास्थ्य पर सरकारी खर्च की हिस्सेदारी 1.15 प्रतिशत से बढ़कर 1.43 प्रतिशत हो गई। नई जीडीपी श्रृंखला के आधार पर यह आंकड़ा 1.48 प्रतिशत बताया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार कुल स्वास्थ्य व्यय (टीएचई) में सरकार की हिस्सेदारी भी लगातार बढ़ी है। वर्ष 2013-14 में यह 28.6 प्रतिशत थी, जो 2022-23 में बढ़कर 43.7 प्रतिशत पहुंच गई। वहीं, आम लोगों द्वारा अपनी जेब से इलाज पर किया जाने वाला खर्च (आउट-ऑफ-पॉकेट एक्सपेंडिचर) घटकर 64.2 प्रतिशत से 43.4 प्रतिशत रह गया है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी पीएम9 जे एवाई), सामाजिक स्वास्थ्य बीमा योजनाओं और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के प्रयासों से लोगों पर आर्थिक बोझ कम हुआ है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कोविड-19 महामारी के दौरान सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में अतिरिक्त निवेश किया। वर्ष 2021-22 में सरकारी स्वास्थ्य व्यय जीडीपी के 1.84 प्रतिशत तक पहुंच गया था। इसमें इमरजेंसी कोविड रिस्पॉन्स पैकेज और दुनिया के सबसे बड़े कोविड टीकाकरण अभियान पर हुआ खर्च शामिल था। इसी दौरान लोगों की जेब से इलाज पर खर्च घटकर 39.4 प्रतिशत तक आ गया था।
सामाजिक सुरक्षा आधारित स्वास्थ्य खर्च में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कुल स्वास्थ्य व्यय में इसकी हिस्सेदारी 2013-14 के 6 प्रतिशत से बढ़कर 2022-23 में 9.9 प्रतिशत हो गई। वहीं, निजी स्वास्थ्य बीमा का हिस्सा भी 3.4 प्रतिशत से बढ़कर 9.2 प्रतिशत पहुंच गया है।
सरकार द्वारा प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च भी दोगुने से अधिक बढ़ा है। वर्ष 2013-14 में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं पर 0.5 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, जो 2022-23 में बढ़कर 1.4 लाख करोड़ रुपये हो गए।
रिपोर्ट के मुताबिक प्रति व्यक्ति सरकारी स्वास्थ्य खर्च भी करीब 2.7 गुना बढ़ा है। यह 2013-14 में 1,042 रुपये था, जो 2022-23 में बढ़कर 2,786 रुपये पहुंच गया।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा रिपोर्ट स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली संसाधन केंद्र (एनएचएसआरसी) द्वारा तैयार की गई है। यह रिपोर्ट स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकारी और निजी खर्च के रुझानों का आकलन करती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी