
नई दिल्ली, 28 मई (हि.स.)। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को कहा कि वर्ष 2025-26 में देश का कुल अनुमानित खाद्यान्न उत्पादन 3,765.63 लाख टन तक पहुंच गया है जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 188 लाख टन अधिक है। वहीं, चावल उत्पादन में भारत ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि चावल का उत्पादन 1,540.24 लाख टन तक पहुंच गया है और चीन को पछाड़ कर अब दुनिया में भारत नंबर वन बन गया है। उन्होंने बताया कि गेहूं का उत्पादन 1,206.57 लाख टन और मक्का का उत्पादन 550.92 लाख टन दर्ज किया गया है जो अपने आप में रिकॉर्ड स्तर है।
दिल्ली स्थित पूसा परिसर में गुरुवार को खरीफ सम्मेलन से संबंधित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, किसानों की आजीविका को बेहतर बनाना और देशवासियों को पोषण युक्त आहार उपलब्ध कराना केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
पूसा में शुरु हुए दो दिवसीय राष्ट्रीय खरीफ अभियान–2026 में देशभर के कृषि मंत्री, वैज्ञानिक और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हो रहे हैं। आईसीएआर, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि भी इस महत्वपूर्ण मंथन का हिस्सा बने हैं। सम्मेलन में खरीफ सीजन की तैयारी को लेकर दो दिनों तक विस्तार से चर्चा और समीक्षा की जाएगी। इसका उद्देश्य किसानों को बेहतर योजना, बेहतर तकनीक और बेहतर समर्थन मिले।
इस मौके पर शिवराज चौहान ने कहा कि केवल खाद्यान्न ही नहीं बल्कि तिलहन उत्पादन में भी देश ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इस वर्ष तिलहन का संभावित उत्पादन 430.59 लाख टन रहने का अनुमान है। इसमें मूंगफली का उत्पादन 130.74 लाख टन और रेपसीड-सरसों का उत्पादन 137.68 लाख टन तक पहुंच गया है जो रिकॉर्ड स्तर है। उन्होंने कहा कि दलहन उत्पादन में भी वृद्धि दर्ज की गई है और आने वाले समय में उत्पादन में और बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि बागवानी क्षेत्र में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसमें अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर और कॉटन मिशन पर भी चर्चा होगी। केंद्रीय कृषि मंत्री ने जलवायु परिवर्तन को कृषि क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि बदलते मौसम और अनियमित बारिश के कारण खेती की परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। गर्मी लगातार बढ़ रही है, कई बार एक साथ अत्यधिक बारिश होती है और फिर लंबे समय तक अंतराल रहता है। ऐसे माहौल में खेती को सुरक्षित और टिकाऊ बनाए रखने के लिए जरूरी कदमों पर भी चर्चा होगी।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि पहले यह सम्मेलन केवल एक दिन का होता था लेकिन इतने बड़े देश में एक दिन में पूरी चर्चा संभव नहीं है इसलिए अब पहले दिन अधिकारी समूहों में बैठकर अलग-अलग राज्यों के साथ विस्तार से विचार-विमर्श करेंगे और दूसरे दिन राज्यों के कृषि मंत्री भी इसमें शामिल होंगे।
केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि इस बार केवल नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑफ एग्रीकल्चर ही नहीं हो रही है बल्कि क्षेत्रीय सम्मेलनों की भी शुरूआत की गई है। अब तक जयपुर, लखनऊ और भुवनेश्वर में तीन क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित किए जा चुके हैं। इसके अलावा दो और सम्मेलन नॉर्थ-ईस्ट और दक्षिण भारत में आयोजित किए जाएंगे, जिनकी तारीखें जल्द तय की जाएंगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी