एनजीटी ने एम्स के पर्यावरण प्रबंधन योजना को सराहा, अन्य सरकारी अस्पतालों में भी लागू करने का दिया सुझाव

30 May 2026 17:05:53
राष्ट्रीय हरित अधिकरण


नई दिल्ली, 30 मई (हि.स.)। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली के परिसर और उसके आसपास वायु प्रदूषण से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा तैयार की गई अस्पतालों के लिए पर्यावरण प्रबंधन योजना की सराहना की है। साथ ही न्यायाधिकरण ने सुझाव दिया कि आवश्यक संशोधनों और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप बदलावों के साथ इस योजना को देश के अन्य सरकारी अस्पतालों में भी लागू किए जाने की संभावनाओं पर विचार किया जाना चाहिए।

यह मामला एम्स, दिल्ली और उसके आसपास बढ़ते वायु प्रदूषण तथा उसके स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों को लेकर दायर याचिका से संबंधित था। ममले की सुनवाई के दौरान एनजीटी ने पाया कि स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा तैयार की गई पर्यावरण प्रबंधन योजना मुख्य रूप से एम्स, दिल्ली की आवश्यकताओं और परिस्थितियों को ध्यान में रखकर विकसित की गई है। हालांकि, न्यायाधिकरण का मानना है कि इस योजना के कई प्रावधान अन्य सरकारी अस्पतालों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकते हैं।

अपने आदेश में एनजीटी ने कहा कि यदि इस योजना में आवश्यक परिवर्तन और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप संशोधन किए जाएं, तो इसे देशभर के सरकारी अस्पतालों में लागू किया जा सकता है। इससे अस्पताल परिसरों में पर्यावरणीय प्रबंधन को बेहतर बनाने के साथ-साथ प्रदूषण नियंत्रण के प्रभावी उपायों को भी बढ़ावा मिलेगा। न्यायाधिकरण ने कहा कि अस्पतालों में स्वच्छ और प्रदूषण-मुक्त वातावरण मरीजों, चिकित्सकों तथा अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के लिए अत्यंत आवश्यक है।

इससे पहले एनजीटी ने केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, विभागों तथा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के प्रतिनिधियों की एक संयुक्त समिति का गठन किया था। समिति को अस्पताल परिसरों और उनके आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण नियंत्रण के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार करने का दायित्व सौंपा गया था।

सुनवाई के दौरान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने न्यायाधिकरण के समक्ष एक शपथपत्र प्रस्तुत कर जानकारी दी कि अस्पतालों के लिए पर्यावरण प्रबंधन योजना तैयार कर ली गई है और इसे मंत्रालय की वेबसाइट पर भी अपलोड कर दिया गया है। मंत्रालय ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य अस्पताल परिसरों में पर्यावरण संरक्षण, कचरा प्रबंधन, वायु गुणवत्ता सुधार तथा हरित उपायों को बढ़ावा देना है।

एनजीटी ने मंत्रालय के प्रयासों की सराहना करते हुए उम्मीद जताई कि इस पहल से न केवल एम्स बल्कि देश के अन्य सरकारी अस्पतालों में भी पर्यावरणीय मानकों को मजबूत करने में सहायता मिलेगी। साथ ही न्यायाधिकरण ने संकेत दिया कि भविष्य में इस योजना के व्यापक क्रियान्वयन पर विचार किया जा सकता है, जिससे स्वास्थ्य संस्थानों के आसपास प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा मिल सके।------------

हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

Powered By Sangraha 9.0