आर्थिक मजबूती के बावजूद भारत को तेल, महंगाई और मानसून के जोखिमों का करना पड़ रहा सामना: वित्त मंत्रालय

30 May 2026 20:39:53
वित्त मंत्रालय के लोगो  का प्रतीकात्मक चित्र


वित्त मंत्रालय के लोगो  का प्रतीकात्मक चित्र


वित्त मंत्रालय के लोगो  का प्रतीकात्मक चित्र


- आर्थिक गतिविधियों में आ सकती नरमी, लेकिन वृद्धि दृष्टिकोण सतर्क रुख के साथ मजबूत

नई दिल्ली, 30 मई (हि.स)। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण पैदा हुई बढ़ती वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूती दिखा रही है। लेकिन, सामान्य से कम मानसून और आर्थिक गतिविधियों में नरमी के अनुमान के साथ आने वाले महीनों में कुल उपभोग मांग पर असर पड़ सकता है। इस तरह कुल मिलाकर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए निकट भविष्य का दृष्टिकोण सतर्क रुख के साथ मजबूत बना हुआ है।

वित्त मंत्रालय ने शनिवार को जारी मासिक आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई हे। आर्थिक मामलों के विभाग (डीईए) की ओर से जारी मई की 'मासिक आर्थिक समीक्षा' के अनुसार, पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण पैदा हुई बढ़ती वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूती दिखा रही है, लेकिन कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, महंगाई का दबाव और कमज़ोर मॉनसून का जोखिम आने वाले महीनों में आर्थिक विकास की गति को धीमा कर सकते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक सामान्य से कम मानसून और आर्थिक गतिविधियों में नरमी के अनुमान के साथ आने वाले महीनों में कुल उपभोग मांग पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, वित्त मंत्रालय ने कहा कि घरेलू बुनियाद मोटे तौर पर मजबूत बनी हुई हैं। विनिर्माण और सेवा के क्षेत्र के पीएमआई (क्रय प्रबंधक सूचकांक) में वृद्धि जारी है। श्रम बाजार स्थिर है एवं विदेशी मुद्रा भंडार बाहरी झटकों से निपटने के लिए पर्याप्त सुरक्षा प्रदान कर रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ऊर्जा, परिवहन और लॉजिस्टिक की बढ़ती लागत ने प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में मुद्रास्फीति के दबाव को सामने ला दिया है और महंगाई को लेकर चिंताओं को फिर से बढ़ा दिया है। इन दबावों के साथ, प्रमुख केंद्रीय बैंक पूर्व अनुमानों की तुलना में अधिक समय तक प्रतिबंधात्मक मौद्रिक नीति का रूख अपनाए रख सकते हैं। इससे विकसित अर्थव्यवस्थाओं में सरकारी बॉन्ड प्रतिफल कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है।

वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया है कि उभरते बाजारों में इसका प्रभाव असमान बना हुआ है। ऊर्जा आयात करने वाली अर्थव्यवस्थाओं को मुद्रा की विनिमय दर में गिरावट, पूंजी निकासी और उच्च आयात बिलों से बढ़ते दबाव का सामना करना पड़ रहा है, जबकि वस्तु निर्यातकों की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर बनी हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने अप्रैल 2026 में अपनी वृद्धि गति को बनाए रखा। लेकिन, ई-वे बिल सृजन, पीएमआई सूचकांक और बिजली की खपत में वृद्धि हुई।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक परिवेश अनिश्चित बने रहने पर वित्त वर्ष 2026-27 में वृद्धि की गति को बनाए रखने और महंगाई दर को काबू में रखने के लिए नीतियों के स्तर पर लचीलापन आवश्यक होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

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