
भोपाल, 30 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश राज्य टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एसटीएएफ) को वन्यजीव तस्करी के विरुद्ध अभियान में बड़ी सफलता मिली है। अंतरराष्ट्रीय कछुआ तस्कर मुनीव्रम मुरुगेसन की जमानत याचिका को उच्चतम न्यायालय, नई दिल्ली ने निरस्त कर दिया है।
जनसम्पर्क अधिकारी केके जोशी ने शनिवार को जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशन में प्रदेश में वन एवं वन्यजीव संरक्षण के लिए लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में एसटीएफ के प्रयासों से थाईलैंड सरकार से प्रत्यर्पण की स्वीकृति मिलने के बाद अंतरराष्ट्रीय तस्कर मुनीव्रम मुरुगेसन को भारत लाया गया था। वर्तमान में वह दिल्ली की तिहाड़ जेल में निरुद्ध है।
जनसम्पर्क अधिकारी के अनुसार, आरोपी मुरुगेशन द्वारा उच्चतम न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका (स्पेशल लीव टू अपील) दायर की गई थी। गत दिवस हुई सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने मामले की परिस्थितियों, प्रत्यर्पण प्रक्रिया की प्रगति तथा उपलब्ध तथ्यों का परीक्षण कर उसे निरस्त कर दिया। राज्य टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एसटीएएफ) द्वारा आरोपी के संबंध में आवश्यक दस्तावेज एवं तथ्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए। इस कार्रवाई में भारत सरकार के संबंधित विभागों एवं एजेंसियों का भी सहयोग प्राप्त हुआ।
जनसम्पर्क अधिकारी जोशी ने बताया कि आरोपी मुरुगेसन के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वन्यजीव तस्करी के कई गंभीर मामले दर्ज हैं। इंटरपोल द्वारा उसके विरुद्ध रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था। वह दुर्लभ प्रजाति के कछुओं की अंतरराष्ट्रीय तस्करी में संलिप्त रहा है। आरोपी को वर्ष 2018 में मध्य प्रदेश वन विभाग एवं एसटीएएफ द्वारा गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया था। उसके विरुद्ध विभिन्न न्यायालयों में विधिक कार्रवाई जारी है।
जनसम्पर्क अधिकारी के अनुसार, वन्यजीव तस्करी के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को ध्वस्त करने की दिशा में उच्चतम न्यायलय के इस निर्णय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आरोपी की गिरफ्तारी और उसके विरुद्ध प्रभावी कानूनी कार्रवाई से वन्यजीव अपराधों पर अंकुश लगाने में सहायता मिलेगी। एसटीएएफ द्वारा अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर वन्यजीव तस्करी के विरुद्ध निरंतर कार्रवाई की जा रही है। प्रदेश सरकार वन्यजीवों की सुरक्षा और अवैध तस्करी पर रोक लगाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। वन्यजीव अपराधों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई भविष्य में भी जारी रहेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर