यूट्यूबर्स पर नए टैक्स प्रस्ताव से पाकिस्तान में विवाद

31 May 2026 21:06:53

इस्लामाबाद, 31 मई (हि.स.)। पाकिस्तान में यूट्यूब कंटेंट क्रिएटर्स पर प्रस्तावित नई कर व्यवस्था को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। संघीय राजस्व बोर्ड (एफबीआर) के एक प्रस्ताव में यूट्यूबर्स की आय के बजाय उनके वीडियो व्यूज के आधार पर टैक्स लगाने की बात सामने आई है, जिसके बाद डिजिटल कंटेंट उद्योग और कर विशेषज्ञों ने इसकी व्यवहारिकता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित व्यवस्था के तहत कुछ विदेशी पाकिस्तानी कंटेंट क्रिएटर्स पर प्रभावी कर दर 66 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। यह कदम डिजिटल प्लेटफॉर्म की वास्तविक कमाई प्रणाली को नजरअंदाज करता है और कई मामलों में कर देनदारी वास्तविक आय से भी अधिक हो सकती है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, यूट्यूब पर कमाई केवल व्यूज की संख्या से तय नहीं होती। कंटेंट निर्माताओं की आय विज्ञापनों, दर्शकों की भौगोलिक स्थिति, विज्ञापनदाताओं की मांग और कंटेंट के प्रकार जैसे कई कारकों पर निर्भर करती है। अलग-अलग देशों और श्रेणियों में प्रति हजार व्यूज (सीपीएम) की दरों में बड़ा अंतर होता है।

दरअसल, कई बार लाखों व्यूज मिलने के बावजूद आय अपेक्षाकृत कम होती है, जबकि कुछ विशेष श्रेणियों के वीडियो कम व्यूज में भी अधिक राजस्व उत्पन्न कर सकते हैं। ऐसे में केवल व्यूज के आधार पर कर निर्धारण करना डिजिटल अर्थव्यवस्था की वास्तविकताओं से मेल नहीं खाता।

प्रस्तावित नीति को लेकर एक और चिंता विदेशों में रहने वाले पाकिस्तानी कंटेंट क्रिएटर्स को लेकर जताई जा रही है। इनमें से कई निर्माता पाकिस्तान के बाहर रहते हैं, विदेशी मुद्रा में आय अर्जित करते हैं और उनकी पाकिस्तान में कोई प्रत्यक्ष व्यावसायिक उपस्थिति नहीं होती। ऐसे मामलों में कराधान के अधिकार क्षेत्र और कानूनी प्रक्रियाओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय

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