सनातन है तो भारत है : स्वामी चिदानन्द

31 May 2026 18:33:53
कुमारसभा द्वारा प्रवर्तित विवेकानंद सेवा सम्मान 2026 से स्वामी चिदानंद सरस्वती (ऋषिकेश) को सम्मानित करते हुए पश्चिम बंगाल के माननीय पंचायत, ग्रामीण, कृषि एवं पशु संसाधन विकास मंत्री श्री दिलीप घोष। अन्य परिलक्षित हैं (बांए से) सर्वश्री महावीर रावत, मनीष जैन,महावीर बजाज, डॉ. तारा दूगड़, राधेश्याम गोयनका, सजज्न कुमार तुलस्यान, भागीरथ चांडक एवं बंशीधर शर्मा।


- स्वामी चिदानंद सरस्वती को मिला विवेकानन्द सेवा सम्मान 2026'

कोलकाता, 31 मई (हि.स.)। सनातन है तो भारत है और भारत है तो सनातन है। सनातन का अर्थ कुछ के लिए नहीं, सबके लिए है। हम अपने-अपने ढ़ंग से व्यक्तिगत देवभक्ति करें किन्तु आज समय आ गया है कि देशभक्ति' हमसब मिलकर करें। सनातन कहता है जिओ और जीवन दो। यह लड़ने मिटने का नहीं, साथ साथ जीने का समय है। आज मानवता को महाभारत नहीं महान भारत की आवश्यता है। भारत पीस ऑफ लैंड नहीं अपितु लैंड ऑफ पीस है।'

उपरोक्त बातें दिव्यांग मुक्त भारत के सूत्रधार एवं परमार्थ निकेतन (ऋषिकेश) के संस्थापक-अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द ससरस्वती ने श्री बड़ाबाजार कुमारसभा पुस्तकालय द्वारा नेशनल लाइब्रोरी सभागार में शनिवार को आयोजित 40वें विवेकानंद सेवा सम्मान समारोह में सम्मान प्राप्त करने के उपरांत कही। समारोह में स्वामी जी को सम्मान स्वरूप एक लाख रुपये की राशि एवं मानपत्र प्रदान किया।

समारोह के प्रधान अतिथि पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने कहा कि ऋषियों एवं विद्वानों की धरती पश्चिम बंगाल में आज जो परिवर्तन दिखाई दे रहा है, वह हिन्दू के एकजुट होने का परिणाम है। हिन्दू जगेगा तो देश जगेगा यानी हिन्दू एकजुट होता है तो कुछ भी असंभव नहीं है। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानन्द ने भारतीय संस्कृति में मानवसेवा के महत्व को विश्व मंच पर प्रतिष्ठित किया एवं स्वामी चिदानंद जी की मानवसेवा उसी सेवाभाव की महती कड़ी है।

विशिष्ट अतिथि एवं प्रख्यात आयकर सलाहकार सज्जन कुमार तुलस्यान ने स्वामी विवेकानन्द के चिंतन और आदर्शों पर चलने पर बल दिया तथा कुमारसभा के प्रयासों की भूरि भूरि प्रशंसा की। समारोह के अध्यक्ष सुप्रसिद्ध उद्योगपति राधेश्याम गोयनका ने स्वामी चिदानंद जी की सेवा कार्यों की सराहना की।

कार्यक्रम का संचालन पुस्तकालय की साहित्यमंत्री डॉ. तारा दूगड़ ने किया जबकि कुमारसभा के अध्यक्ष महावीर बजाज ने स्वागत भाषण दिया। कल्याण मंत्र का पाठ किया उपमंत्री सत्यप्रकाश राय ने। प्रारंभ में मीता गाड़ोदिया ने स्वामीजी पर केन्द्रित ओ वरेण्य योद्धा संन्यासी' गीत प्रस्तुत किया। श्री अजयेन्द्रनाथ त्रिवेदी के वैदिक मंत्रों के साथ खुशबू बजाज एवं शरण्या दूगड़ ने तिलक तथा सज्जन कुमार तुलस्यान, भागीरथ चांडक, बंशीधर शर्मा, राधेश्याम गोयनका तथा दिलीप घोष ने माला,शॉल, श्रीफल, चेक एवं मानपत्र से पूज्य स्वामी चिदानंद सरस्वती जी का विधिवत् सम्मान किया।

विनोद बागडोदिया, महावीर प्रसाद रावत, आचार्य राकेश कुमार पाण्डेय एवं नन्दकुमार लढ़ा ने अतिथियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया।

समारोह में पद्मश्री प्रहलादराय अग्रवाल, कुंजबिहारी अग्रवाल, बनवारीलाल सोती, सांवरमल अग्रवाल, अशोक मोदी, जेएस मेहता, विजय चोरड़िया, प्रो. अजय प्रताप सिंह, मुरारीलाल दीवान, जगमोहन बागला, काशीप्रसाद खंडेलवाल, अमरनाथ चौधरी, नन्दकिशोर लखोटिया, सोमनाथ अडूकिया, गोपाल भालोटिया, राजेन्द्र कानूनगो, ओमप्रकाश रावत, कौशल किशोर त्रिवेदी, पुरुषोत्तम तिवारी, रतनलाल अग्रवाल, सागरमल गुप्ता, शिवकुमार लोहिया, गोविंद सारड़ा, शांता सारड़ा, शंकरलाल अग्रवाल, डॉ. विन्देश्वरी प्रसाद सिंह सहित कोलकाता एवं हावड़ा के सामाजिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र के अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष मधुप

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