मप्र के सीधी में हाथियों ने बुजुर्ग दंपति की कुचलकर ली जान, गुस्साए ग्रामीणों ने शव उठाने से किया इनकार

01 Jun 2026 12:26:53
आधी रात हाथियों ने कच्चा मकान तोड़ बुजुर्ग दंपती को कुचला


आधी रात हाथियों ने कच्चा मकान तोड़ बुजुर्ग दंपती को कुचला


सीधी, 01 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सीधी जिले के वनांचल क्षेत्र में रविवार देर रात हाथियों के आतंक ने एक बार फिर दो जिंदगियां छीन लीं। ग्राम पंचायत गाजर अंतर्गत चिनगी गांव में जंगली हाथियों के झुंड ने आधी रात एक कच्चे मकान पर हमला कर उसमें सो रहे बुजुर्ग दंपति को कुचल दिया। इसमें दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद पूरे गांव में मातम और दहशत का माहौल है। आक्रोशित ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए शव उठाने से इनकार कर दिया है।

बताया गया कि रविवार देर रात करीब 2 बजे हाथियों का एक झुंड चिनगी गांव में पहुंचा। गांव के बाहर स्थित अपने कच्चे मकान में भैयालाल यादव (60) और उनकी पत्नी तिलिया यादव (58) सो रहे थे। इसी दौरान हाथियों ने मकान को चारों ओर से घेर लिया और दीवारें तोड़ते हुए भीतर घुस गए। अचानक हुए हमले से दंपती संभल भी नहीं पाए और हाथियों ने उन्हें कुचल दिया। दोनों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। ग्रामीणों के अनुसार रात के सन्नाटे में हाथियों की चिंघाड़ और मकान टूटने की आवाज सुनकर लोग घरों से बाहर निकले, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। हाथियों के झुंड के कारण ग्रामीण काफी देर तक दहशत में रहे।

प्रशासन के खिलाफ फूटा आक्रोश

घटना की खबर फैलते ही पूरे गांव में शोक और गुस्से का माहौल बन गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जमा हो गए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए शवों को उठाने से इनकार कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल वन्यजीव हमले की घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता का परिणाम है। उनका आरोप है कि क्षेत्र में हाथियों की लगातार आवाजाही और खतरे की जानकारी होने के बावजूद प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और सुरक्षा को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। यदि समय रहते विस्थापन की प्रक्रिया पूरी कर ली जाती, तो यह दर्दनाक हादसा टाला जा सकता था।

40 परिवार आज भी खतरे के बीच रहने को मजबूर

ग्रामीणों ने बताया कि वन क्षेत्र में बसे कई परिवारों का पूर्व में विस्थापन किया जा चुका है, लेकिन भैयालाल यादव के परिवार सहित करीब 40 परिवार अब भी गांव में रह रहे हैं। इन परिवारों को विस्थापन योजना का लाभ नहीं मिल पाया, जिसके कारण वे हाथियों और अन्य वन्यजीवों के स्थायी खतरे के बीच जीवन गुजारने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विस्थापन को लेकर कई बार प्रशासन, वन विभाग और एसडीएम कार्यालय को आवेदन दिए गए, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। कुछ लोगों का आरोप है कि मुआवजा और पुनर्वास पैकेज को लेकर स्पष्टता नहीं होने से भी प्रक्रिया प्रभावित हुई।

मुआवजा और पुनर्वास को लेकर उठे सवाल

ग्रामीणों के मुताबिक पहले विस्थापन पैकेज के तहत प्रति व्यक्ति 10 लाख रुपये की राशि निर्धारित थी, जिसे लगभग एक वर्ष पूर्व बढ़ाकर 15 लाख रुपये किया गया था। इसके बावजूद कई पात्र परिवारों को योजना का लाभ नहीं मिल सका। अब ग्रामीण प्रशासन से तत्काल पुनर्वास, उचित मुआवजा और हाथियों के आतंक से स्थायी राहत की मांग कर रहे हैं।

मौके पर पहुंचा प्रशासनिक अमला

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, राजस्व और वन विभाग की टीमें गांव पहुंच गईं। अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। एसडीएम शैलेश कुमार द्विवेदी ने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासनिक टीम को मौके पर भेजा गया है। पूरे मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी और प्रभावित परिवार को शासन की नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

हाथियों के बढ़ते आवागमन से बढ़ी चिंता

सीधी और आसपास के वन क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों से हाथियों की आवाजाही लगातार बढ़ी है। कई बार फसलों को नुकसान पहुंचाने और ग्रामीणों पर हमले की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। वन विभाग द्वारा निगरानी और अलर्ट जारी किए जाने के बावजूद मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। चिनगी गांव की यह घटना एक बार फिर वन्यजीव प्रबंधन, पुनर्वास नीति और ग्रामीण सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

गांव में दहशत, जवाब का इंतजार

फिलहाल चिनगी गांव में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि वे केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहते हैं। दो लोगों की मौत के बाद अब पूरा गांव खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है और प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग कर रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे

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