
नई दिल्ली, 01 जून (हि.स.)। हर साल 21 जून को मनाए जाने वाले 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग रखी गई है। यह थीम शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में योग की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करती है।
इस थीम को जारी करते हुए सोमवार को
केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने कहा कि बढ़ती जीवन प्रत्याशा के दौर में केवल लंबा जीवन ही नहीं बल्कि स्वस्थ और सक्रिय जीवन भी महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि योग लोगों को गरिमापूर्ण और स्वस्थ तरीके से उम्र बढ़ाने की कला सिखाता है।
स्वस्थ वृद्धावस्था में योग की भूमिका
महत्वपूर्ण है। योग शरीर की लचीलापन, संतुलन और गतिशीलता बनाए रखने में मदद करता है। श्वास अभ्यास, ध्यान और माइंडफुलनेस मानसिक स्वास्थ्य एवं भावनात्मक संतुलन को मजबूत करते हैं।
उन्होंने कहा कि
वैश्विक स्तर पर योग और स्वस्थ वृद्धावस्था पर शोध तेजी से बढ़ा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2014 में इस विषय पर 183 शोध-पत्र प्रकाशित हुए थे।
वर्ष 2025 तक यह संख्या बढ़कर 1,207 हो गई।
2020 में शोध-पत्रों की संख्या 500 के पार पहुंच गई थी।
यह वृद्धि दर्शाती है कि उम्र से जुड़ी शारीरिक और मानसिक चुनौतियों के समाधान में योग की उपयोगिता को वैज्ञानिक समुदाय भी स्वीकार कर रहा है।
उन्होंने कहा कि योग से
“सिल्वर इकोनॉमी” को बढ़ावा
मिलेगा।
भारत में वरिष्ठ नागरिकों से जुड़ी अर्थव्यवस्था- जिसमें स्वास्थ्य सेवाएं, वेलनेस, पुनर्वास, डिजिटल हेल्थ और बुजुर्गों की देखभाल शामिल है- लगभग 73,000 करोड़ रुपये की मानी जाती है और आने वाले वर्षों में इसके तेजी से बढ़ने की संभावना है।
प्रताप राव जाधव ने बताया कि आयुष मंत्रालय ने योग को जन-जन तक पहुंचाने के लिए कई कार्यक्रम शुरू किए हैं। जिसमें योग 365 सालभर नियमित योग अभ्यास को बढ़ावा देने की पहल, योग समावेश, गैर-संचारी रोगों और बुजुर्गों के लिए विशेष योग प्रोटोकॉल शामिल है।
नवाचार और बुजुर्गों की देखभाल
सरकार की वरिष्ठ नागरिकों के लिए सेज जैसी पहलें बुजुर्गों की देखभाल और स्वास्थ्य सेवाओं में नवाचार तथा स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित कर रही हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी