बिहार के शिक्षा मंत्री ने दिल्ली के संस्कृत विवि के कुलपति से की मुलाकात

11 Jun 2026 17:54:53
श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (फाइल फोटो)।


- संस्कृत शिक्षा, शोध, डिजिटल तकनीक, भारतीय ज्ञान परंपरा के वैश्विक प्रसार पर हुई विस्तृत चर्चा

नई दिल्ली, 11 जून (हि.स.)। संस्कृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन और वैश्विक पुनरुत्थान की दिशा में एक पहल के तहत बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने दिल्ली के श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुरलीमनोहर पाठक से गुरुवार को मुलाकात की। उन्होंने उनके साथ संस्कृत शिक्षा और भारतीय ज्ञान परंपरा के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा की। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. पवन कुमार शर्मा भी उपस्थित रहे।

यहां आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में संस्कृत भाषा की वर्तमान स्थिति, उसके शैक्षणिक विकास, शोध गतिविधियों तथा भविष्य की संभावनाओं पर गंभीर और सार्थक विचार-विमर्श हुआ। बैठक में इस बात पर व्यापक सहमति व्यक्त की गई कि संस्कृत केवल एक प्राचीन भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, दर्शन, आध्यात्मिक चिंतन और समृद्ध ज्ञान परंपरा की मूल आधारशिला है। इसलिए इसे आधुनिक शिक्षा व्यवस्था और नई तकनीकों के साथ जोड़कर नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने की आवश्यकता है।

शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बिहार में संस्कृत शिक्षा को सशक्त बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी देते हुए कहा कि संस्कृत विद्यालयों और महाविद्यालयों के सुदृढ़ीकरण, योग्य शिक्षकों की नियुक्ति तथा विद्यार्थियों में संस्कृत के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है। यदि संस्कृत को डिजिटल शिक्षण प्रणाली, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित संसाधनों और रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों से जोड़ा जाए तो यह युवाओं के लिए और अधिक उपयोगी एवं आकर्षक बन सकती है।

बैठक के दौरान कुलपति प्रो. पाठक ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों, शोध परियोजनाओं तथा संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य संस्कृत को केवल पारंपरिक अध्ययन तक सीमित रखना नहीं है, बल्कि उसे समकालीन संदर्भों में प्रासंगिक और उपयोगी बनाना भी है। इसी उद्देश्य से डिजिटल संसाधनों के विकास, ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के संचालन तथा विदेशी विश्वविद्यालयों और संस्थानों के साथ शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।

कुलसचिव प्रो. पवन कुमार शर्मा ने विश्वविद्यालय की प्रशासनिक एवं शैक्षणिक व्यवस्थाओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि संस्थान में पारदर्शी, प्रभावी और परिणामोन्मुखी कार्य संस्कृति विकसित की जा रही है। विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने तथा शोध और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए विश्वविद्यालय निरंतर सुधारात्मक कदम उठा रहा है।

बैठक में भारतीय ज्ञान परंपरा को वैश्विक मंच पर स्थापित करने के विषय पर भी गंभीर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने संस्कृत शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने, विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए नए अवसर विकसित करने तथा डिजिटल माध्यमों से संस्कृत को जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया। इस दौरान संस्कृत को रोजगार, शोध और नवाचार से जोड़ने के विभिन्न आयामों पर भी चर्चा की गई।

बैठक के अंत में शिक्षा मंत्री तिवारी और कुलपति प्रो. पाठक ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के संवाद और सहयोग से संस्कृत भाषा को नई ऊर्जा मिलेगी तथा भारतीय ज्ञान परंपरा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान प्राप्त होगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी

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